Spread the love देहरादून/बद्रीनाथ। बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की राशि में कथित हेराफेरी और चोरी के मामले में उत्तराखंड सरकार ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी करना “गौहत्या और माता-पिता की हत्या जैसा महापाप” है और ऐसे अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। आरोपी PA पर FIR और निलंबन मामले में प्रमोद नौटियाल को मुख्य आरोपी बनाया गया है। वह श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष कार्यालय में व्यक्तिगत सहायक (PA) के रूप में कार्यरत था। बताया गया है कि 2 जुलाई 2026 को दान गणना केंद्र (Donation Counting Centre) के CCTV फुटेज की जांच के दौरान आरोपी की संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। आरोप है कि नियमित गिनती के दौरान उसने कथित रूप से कुछ नकदी अथवा चढ़ावे की सामग्री अवैध रूप से अपने पास छिपा ली। BKTC की शिकायत पर उत्तराखंड पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक विश्वासघात और चोरी का मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही आरोपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जोशीमठ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति में शामिल हैं— आनंद स्वरूप — अध्यक्ष संदीप तिवारी — सदस्य जगत सिंह चौहान — सदस्य समिति को 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के प्रमुख बिंदु समिति निम्नलिखित पहलुओं की जांच करेगी— कथित वित्तीय गड़बड़ी की वास्तविक मात्रा। सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जिम्मेदारी। दान गिनती प्रणाली में मौजूद कमियां। भविष्य में चढ़ावे के संग्रह और गिनती को अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के उपाय। जवाबदेही तय करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश। कैसे सामने आया मामला? यह विवाद 3 जुलाई 2026 को तब चर्चा में आया जब स्थानीय संगठन भैरव सेना ने बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का आरोप सार्वजनिक किया। इसके बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। विपक्ष ने भी घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद सरकार ने तत्काल जांच समिति गठित कर दी। सरकार का संदेश राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्थलों की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। नोट: मामले की जांच अभी जारी है। अंतिम तथ्य जांच समिति की रिपोर्ट और पुलिस विवेचना के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिलहाल आरोपी के विरुद्ध आरोप लगाए गए हैं, जिनकी पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगी। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड में मानसून का कहर: चारधाम यात्रा पर संकट, IMD का हाई अलर्ट, हेलीकॉप्टर सेवाएं बंद उत्तराखंड में मानसून का कहर: 9 और 10 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट, कई जिलों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी, नदियां उफान पर और भूस्खलन का बढ़ा खतरा