देहरादून में 'लोक संवर्धन पर्व-2026' का भव्य आगाज़, मुख्यमंत्री धामी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने किया शुभारंभ
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देहरादून। दैनिक प्रभातवाणी।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में शनिवार, 11 जुलाई 2026 से पांच दिवसीय ‘लोक संवर्धन पर्व-2026’ का भव्य शुभारंभ हो गया। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ‘प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास)’ योजना के अंतर्गत आयोजित इस राष्ट्रीय महोत्सव का उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संयुक्त रूप से किया।

11 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस आयोजन का उद्देश्य देश की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प, हथकरघा और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना तथा कारीगरों को नए बाजार और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उद्घाटन समारोह में विभिन्न राज्यों से आए कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, कलाकारों, उद्यमियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भाग लिया।

उत्तराखंड बना देश का पहला साझेदार राज्य

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है कि केंद्र सरकार के साथ इस प्रकार के आयोजन में साझेदारी करने वाला राज्य देश का पहला राज्य बना है। उन्होंने कहा कि देवभूमि की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक शिल्प और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री की सोच के अनुरूप देश की पारंपरिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे आयोजन स्थानीय शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों के लिए नए व्यापारिक अवसर पैदा करते हैं।

150 स्टॉलों में सजी देश की सांस्कृतिक विरासत

लोक संवर्धन पर्व में देशभर से आए कारीगरों ने अपने उत्कृष्ट हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, पारंपरिक वस्त्र, लकड़ी की नक्काशी, धातु शिल्प, हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं, आभूषण, बांस एवं प्राकृतिक उत्पादों सहित अनेक कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई है।

मेले में कुल 150 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें लगभग 40 प्रतिशत स्टॉल उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक शिल्प और प्रसिद्ध व्यंजनों को समर्पित हैं। आगंतुक यहां राज्य की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय हस्तकला को करीब से देख और खरीद सकते हैं।

लाइव शिल्प प्रदर्शन बना आकर्षण

मेले का सबसे बड़ा आकर्षण मास्टर कारीगरों द्वारा किए जा रहे लाइव शिल्प प्रदर्शन हैं। आगंतुक अपनी आंखों के सामने पारंपरिक कलाकृतियों को बनते हुए देख सकेंगे और शिल्प निर्माण की तकनीकों को समझ सकेंगे।

इसके साथ ही युवा उद्यमियों और कारीगरों के लिए डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, ब्रांडिंग तथा ऑनलाइन बिक्री से जुड़े विशेष प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। खरीदार-विक्रेता बैठकें भी इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनके माध्यम से कारीगरों को बड़े बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

हर शाम होगी सांस्कृतिक संध्या

लोक संवर्धन पर्व में प्रतिदिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसमें उत्तराखंड के लोक कलाकारों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपनी रंगारंग प्रस्तुतियां देंगे। लोकगीत, लोकनृत्य, सूफी संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण होंगे।

स्थानीय उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

आयोजकों का मानना है कि यह महोत्सव केवल एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच है। इससे हस्तशिल्प उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पारंपरिक कला को नई पहचान मिलेगी।

आम जनता के लिए निःशुल्क प्रवेश

पांच दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। देहरादून आने वाले पर्यटक और स्थानीय नागरिक सुबह 10:00 बजे से रात 8:00 बजे तक मेले का आनंद ले सकते हैं।

आयोजन की मुख्य जानकारी

  • आयोजन: लोक संवर्धन पर्व-2026
  • तिथि: 11 जुलाई से 15 जुलाई 2026
  • स्थान: परेड ग्राउंड, देहरादून
  • समय: प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
  • प्रवेश शुल्क: पूर्णतः निःशुल्क
  • मुख्य आकर्षण: 150 स्टॉल, हस्तशिल्प प्रदर्शनी, लाइव शिल्प प्रदर्शन, डिजिटल मार्केटिंग सत्र, खरीदार-विक्रेता बैठकें एवं प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्या

देहरादून में आयोजित ‘लोक संवर्धन पर्व-2026’ पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आयोजन न केवल कारीगरों को आर्थिक अवसर प्रदान करेगा, बल्कि उत्तराखंड सहित देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान भी दिलाएगा। आगामी पांच दिनों तक परेड ग्राउंड कला, संस्कृति, संगीत और पारंपरिक भारतीय शिल्प का जीवंत केंद्र बना रहेगा।

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