मतदाता पहचान और वोटर लिस्ट अपडेट का मामला: 19 लाख से अधिक मतदाता अभी भी ‘अनमैप्ड’, विशेष गहन संशोधन से सुलझेगा मुद्दा
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दैनिक प्रभातवाणी | राज्य ब्यूरो
दैनिक प्रभातवाणी |देहरादून | 5 फरवरी 2026

प्रदेश में मतदाता पहचान और वोटर लिस्ट को लेकर एक अहम प्रशासनिक चुनौती सामने आई है। चुनाव आयोग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 19 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनका अब तक ब्लॉक लेवल अधिकारी यानी बीएलओ सत्यापन के दौरान “अनमैप्ड” दर्ज किया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इन मतदाताओं का डेटा अभी डिजिटल सत्यापन प्रणाली से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया है, जिससे उनकी मतदाता स्थिति पर स्पष्टता नहीं बन सकी है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी, त्रुटिरहित और अद्यतन बनाए रखने के लिए विशेष गहन संशोधन, जिसे एसआईआर कहा जाता है, की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति का अवसर दिया जाएगा, ताकि जिन मतदाताओं का नाम सूची में गलत तरीके से दर्ज है, छूट गया है या जिनका डेटा अधूरा है, उन्हें सही किया जा सके। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे।

प्रदेश के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में यह समस्या सामने आई है। कई मामलों में मतदाताओं के पते में बदलाव, लंबे समय से निवास स्थान से बाहर रहना, आधार या अन्य दस्तावेजों का सही तरीके से लिंक न होना और तकनीकी कारणों से डेटा अपलोड न हो पाना प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं। बीएलओ स्तर पर किए गए भौतिक सत्यापन के बावजूद इन मतदाताओं का डिजिटल रिकॉर्ड पूरी तरह मैप नहीं हो सका, जिससे वे “अनमैप्ड” श्रेणी में चले गए।

विशेष गहन संशोधन के दौरान मतदाताओं को यह अवसर मिलेगा कि वे स्वयं आगे आकर अपने दस्तावेजों के साथ दावा प्रस्तुत करें या यदि किसी नाम को लेकर आपत्ति है तो उसे दर्ज कराएं। इस प्रक्रिया में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का उपयोग किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग आसानी से इसमें भाग ले सकें। आयोग ने जिला प्रशासन और चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस अभियान को जन-जागरूकता के साथ चलाएं, ताकि लोगों को सही जानकारी समय पर मिल सके।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह मुद्दा अहम माना जा रहा है, क्योंकि बड़ी संख्या में मतदाताओं का अनमैप्ड रहना भविष्य के चुनावों में मतदान प्रतिशत और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो कई पात्र मतदाता मतदान से वंचित रह सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होगी। इसी कारण आयोग इस बार विशेष गहन संशोधन को गंभीरता से लागू करने की तैयारी में है।

राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने मतदाता पहचान पत्र और वोटर लिस्ट में दर्ज विवरण की जांच अवश्य करें। यदि किसी प्रकार की त्रुटि या कमी पाई जाती है, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा-आपत्ति प्रक्रिया में भाग लें। इससे न केवल उनका मताधिकार सुरक्षित रहेगा, बल्कि राज्य की मतदाता सूची भी अधिक सटीक और भरोसेमंद बन सकेगी।

कुल मिलाकर, 19 लाख से अधिक अनमैप्ड मतदाताओं का मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है। विशेष गहन संशोधन के माध्यम से इसे सुलझाने की पहल की जा रही है, जो आने वाले चुनावों से पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दैनिक प्रभातवाणी इस प्रक्रिया से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी अपने पाठकों तक पहुंचाता रहेगा।