साइबर ठगी के मामले बढ़े, फर्जी लोन ऐप और OTP फ्रॉड से लोग परेशान
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हरिद्वार | 22 अप्रेल 2026 | दैनिक प्रभातवाणी 

उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऑनलाइन फर्जी लोन ऐप, ओटीपी फ्रॉड और केवाईसी अपडेट के नाम पर हो रही ठगी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रही है। पुलिस प्रशासन ने इसको लेकर सतर्कता बढ़ा दी है और नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें।

देहरादून और हरिद्वार में साइबर ठगी का बढ़ता नेटवर्क

राजधानी Dehradun और धर्मनगरी Haridwar में पिछले कुछ महीनों से साइबर अपराधियों की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। इन दोनों शहरों में सबसे ज्यादा शिकायतें फर्जी लोन ऐप्स और बैंकिंग से जुड़े धोखाधड़ी मामलों की मिल रही हैं। कई लोग आसान लोन के लालच में मोबाइल ऐप डाउनलोड कर लेते हैं और फिर धीरे-धीरे उनकी निजी जानकारी साइबर अपराधियों के हाथ लग जाती है।

पुलिस जांच में यह सामने आया है कि ठग पहले लोगों को कम ब्याज दर पर तुरंत लोन देने का झांसा देते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति ऐप डाउनलोड करता है, उससे केवाईसी अपडेट के नाम पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक डिटेल्स मांगी जाती हैं। इसके बाद ओटीपी लेकर खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं या ब्लैकमेलिंग शुरू हो जाती है।

ओटीपी फ्रॉड से सबसे ज्यादा नुकसान

साइबर ठगी के मामलों में सबसे खतरनाक तरीका ओटीपी फ्रॉड बनकर सामने आया है। इसमें ठग बैंक अधिकारी, टेलीकॉम कंपनी या किसी सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बनकर फोन करते हैं। वे कहते हैं कि आपके खाते को अपडेट करना है या KYC वेरिफिकेशन जरूरी है। जैसे ही व्यक्ति ओटीपी साझा करता है, उसका बैंक खाता खाली कर दिया जाता है।

कई मामलों में यह भी देखा गया है कि ठग व्हाट्सएप या एसएमएस के जरिए फर्जी लिंक भेजते हैं, जिस पर क्लिक करते ही मोबाइल हैक हो जाता है और सारी बैंकिंग जानकारी चोरी हो जाती है।

केवाईसी अपडेट के नाम पर नया जाल

आजकल सबसे ज्यादा ठगी केवाईसी अपडेट के नाम पर हो रही है। साइबर अपराधी बैंक या मोबाइल कंपनी का नाम लेकर लोगों को डराते हैं कि अगर तुरंत केवाईसी अपडेट नहीं किया गया तो खाता बंद हो जाएगा।

इस डर के कारण लोग बिना जांच-पड़ताल किए अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं। बाद में पता चलता है कि पूरा पैसा निकाल लिया गया है या लोन के नाम पर उनके नाम पर कर्ज ले लिया गया है।

पुलिस की सख्त चेतावनी

पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि कोई भी बैंक, सरकारी एजेंसी या टेलीकॉम कंपनी कभी भी फोन पर ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगती। यदि कोई ऐसा करता है तो वह निश्चित रूप से साइबर ठग होता है।

साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड न करें और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। साथ ही अगर किसी के साथ ठगी हो जाती है तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज करें।

साइबर अपराधियों के नए तरीके

जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर ठग अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को फंसाया जा रहा है।

कई मामलों में ठग नौकरी, लोन या इनाम के नाम पर लोगों को आकर्षित करते हैं और फिर धीरे-धीरे उनकी बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं। कुछ मामलों में तो लोगों के मोबाइल पूरी तरह से हैक कर लिए जाते हैं और उनके संपर्कों को भी मैसेज भेजकर ठगी की जाती है।

आम लोगों में बढ़ती चिंता

देहरादून और हरिद्वार में लगातार बढ़ रहे इन मामलों ने आम जनता को सतर्क कर दिया है। कई लोगों का कहना है कि अब किसी भी कॉल या मैसेज पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो गई है।

बचाव के उपाय

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार कुछ सावधानियां अपनाकर इन ठगी से बचा जा सकता है। किसी भी अनजान ऐप को इंस्टॉल न करें, ओटीपी किसी के साथ साझा न करें, और बैंक से जुड़ी किसी भी जानकारी को फोन पर न बताएं।

इसके अलावा अपने मोबाइल और बैंक अकाउंट में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर चालू रखें। समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दें।

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