Spread the loveपोखरी(चमोली)। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सेल्फी और रील बनाने का बढ़ता जुनून एक बार फिर बड़ी दुर्घटना का कारण बनते-बनते बच गया। खूबसूरत लेकिन बेहद खतरनाक पहाड़ी इलाकों में थोड़ी सी लापरवाही किस तरह जान पर भारी पड़ सकती है, इसका ताजा उदाहरण चमोली जनपद के पोखरी क्षेत्र में सामने आया है। यहां सेल्फी लेते समय एक युवक अचानक संतुलन खो बैठा और गहरी खाई में जा गिरा। हालांकि राहत की बात यह रही कि समय रहते पुलिस की तत्परता और साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन के चलते युवक की जान बच गई। यह घटना दिनांक 29 मई 2026 की बताई जा रही है, जब रवि जोशी, निवासी बिंदुखत्ता थाना लालकुआं जनपद नैनीताल ने डायल 112 पर सूचना दी कि उसका मित्र कुशाल सिंह भंडारी सेल्फी लेते समय अचानक फिसलकर गहरी खाई में गिर गया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत रेस्क्यू टीम को मौके के लिए रवाना किया गया। चमोली जनपद का पोखरी क्षेत्र Pokhari अपने दुर्गम पहाड़ी रास्तों और गहरी खाइयों के लिए जाना जाता है, जहां छोटी सी चूक भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। इसी चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थिति के बीच पुलिस के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन करना बेहद जोखिम भरा साबित हुआ, लेकिन इसके बावजूद टीम ने साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। सूचना मिलते ही थाना पोखरी पुलिस के अपर उपनिरीक्षक दलवीर सिंह और हेड कांस्टेबल जसवंत सिंह अपनी टीम के साथ आवश्यक आपदा उपकरणों सहित तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना हुए। घटनास्थल पर पहुंचते ही टीम ने स्थिति का जायजा लिया और बिना समय गंवाए गहरी खाई में उतरने का निर्णय लिया। खाई की ढलान बेहद खड़ी और चट्टानी थी, जहां हर कदम पर जान का जोखिम बना हुआ था। रेस्क्यू के दौरान पुलिस कर्मियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। चट्टानों के बीच फिसलन, अस्थिर मिट्टी और गहरी खाई में सीमित दृश्यता के कारण ऑपरेशन और भी चुनौतीपूर्ण हो गया था। लेकिन पुलिस टीम ने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करते हुए घायल युवक तक पहुंच बनाई। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने कुशाल सिंह भंडारी को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। युवक को खाई से निकालते समय उसकी हालत गंभीर नहीं थी, लेकिन उसके सिर और चेहरे पर हल्की चोटें आई थीं। उसे तुरंत सुरक्षित स्थान पर लाया गया और प्राथमिक सहायता प्रदान की गई। इसके बाद घायल युवक को एंबुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोखरी पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। चिकित्सकों के अनुसार युवक को गंभीर चोटें नहीं आई हैं और उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। समय रहते मिली सहायता के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई। यह पूरा घटनाक्रम बेहद तेजी से घटित हुआ और स्थानीय लोगों के बीच भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस की तत्परता, साहस और मानवता की जमकर सराहना की। ग्रामीणों का कहना था कि यदि पुलिस कुछ देर और पहुंचने में देरी करती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर क्यों युवा पीढ़ी खतरनाक स्थानों पर सेल्फी और वीडियो बनाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष रूप से चट्टानों, खाइयों, नदी किनारों और संकरे रास्तों पर थोड़ी सी असावधानी भी जानलेवा साबित हो सकती है। स्थानीय प्रशासन ने भी इस घटना के बाद लोगों से अपील की है कि वे पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा नियमों का पालन करें और किसी भी तरह की जोखिम भरी गतिविधियों से बचें। खासकर सोशल मीडिया के लिए खतरनाक जगहों पर फोटो या वीडियो बनाने का प्रयास न करें। पुलिस विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और पर्यटक स्थलों पर लोगों को यह बताया जाएगा कि सेल्फी या रील बनाते समय किस तरह की सावधानियां जरूरी हैं। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि एक चेतावनी है, जो यह बताती है कि आधुनिक दौर में सोशल मीडिया का जुनून किस तरह जानलेवा रूप ले सकता है। कुशाल सिंह भंडारी की जान बच गई, लेकिन हर बार किस्मत इतनी मेहरबान नहीं होती। चमोली जनपद Chamoli जैसे क्षेत्रों में पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां पर्यटक और स्थानीय लोग फोटो और वीडियो के चक्कर में खतरनाक स्थानों पर चले जाते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे इलाकों में चेतावनी बोर्ड और निगरानी व्यवस्था और मजबूत की जानी चाहिए। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल पुलिस कर्मियों की भूमिका को भी सराहा जा रहा है। बिना अपनी सुरक्षा की परवाह किए उन्होंने जिस तरह से खाई में उतरकर युवक की जान बचाई, वह वास्तव में कर्तव्यनिष्ठा और साहस का उदाहरण है। स्थानीय लोगों ने इसे “फरिश्ता बनकर आई पुलिस” की संज्ञा दी। इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पहाड़ी इलाकों में पर्यटन के दौरान केवल प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी उतना ही आवश्यक है। सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाहत कई बार जीवन के लिए खतरा बन सकती है। डायल 112 की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली ने भी इस मामले में अहम भूमिका निभाई। सूचना मिलते ही बिना देरी किए रेस्क्यू टीम का रवाना होना और मौके पर पहुंचकर सही रणनीति अपनाना ही इस सफलता का मुख्य कारण रहा। अंत में, प्रशासन और पुलिस दोनों ने संयुक्त रूप से लोगों से अपील की है कि वे पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करते समय सावधानी बरतें, निर्धारित रास्तों का ही उपयोग करें और खतरनाक स्थानों पर फोटो या सेल्फी लेने से बचें। यह घटना एक संदेश छोड़ जाती है कि जीवन की सुरक्षा किसी भी फोटो या वीडियो से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। थोड़ी सी लापरवाही कभी-कभी पूरी जिंदगी बदल सकती है, इसलिए हर कदम पर सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड मौसम अलर्ट: 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