Spread the love9 फरवरी 2026 | देहरादून | उत्तराखंड | दैनिक प्रभातवाणीउत्तराखंड सरकार ने राज्य की ऊर्जा व्यवस्था को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए हरिद्वार में 16 मेगावाट/40 मेगावाट-घंटा क्षमता के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) की स्थापना के लिए औपचारिक रूप से बोली आमंत्रित की है। इस परियोजना को प्रदेश के ऊर्जा प्रबंधन में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी और लोड संतुलन की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।राज्य सरकार के अनुसार, बीईएसएस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच तालमेल को बेहतर बनाना है। अक्सर देखा जाता है कि पीक ऑवर यानी अधिक मांग के समय बिजली पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जबकि कम मांग के समय उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम ऐसे समय में अतिरिक्त ऊर्जा को संग्रहित कर लेगा और जरूरत पड़ने पर उसे ग्रिड में वापस भेजेगा, जिससे बिजली कटौती और वोल्टेज उतार-चढ़ाव जैसी समस्याओं में कमी आएगी।हरिद्वार को इस परियोजना के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यह औद्योगिक गतिविधियों और आबादी दोनों की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। बीईएसएस के स्थापित होने से न केवल औद्योगिक इकाइयों को स्थिर बिजली आपूर्ति मिलेगी, बल्कि घरेलू उपभोक्ताओं को भी बेहतर सेवा का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही यह प्रणाली ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएगी।ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों से मिलने वाली बिजली मौसम पर निर्भर होती है, जिससे उत्पादन में अस्थिरता बनी रहती है। बैटरी स्टोरेज सिस्टम इस अस्थिरता को संतुलित करने में मदद करेगा और स्वच्छ ऊर्जा को अधिक प्रभावी ढंग से ग्रिड से जोड़ने का रास्ता खोलेगा।सरकार को उम्मीद है कि इस परियोजना के माध्यम से भविष्य में राज्य में ऐसे और आधुनिक ऊर्जा समाधान अपनाने का मार्ग प्रशस्त होगा। बोली प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी द्वारा तय समय सीमा में परियोजना को धरातल पर उतारने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीईएसएस जैसी योजनाएं उत्तराखंड को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल विकास की दिशा में भी आगे बढ़ाएंगी।कुल मिलाकर, हरिद्वार में प्रस्तावित यह बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम परियोजना उत्तराखंड की ऊर्जा नीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है, जिससे आने वाले वर्षों में राज्य की बिजली व्यवस्था अधिक मजबूत, संतुलित और टिकाऊ बन सकेगी। Post Views: 9 Post navigationपरेड ग्राउंड कार्यक्रम में भावुक हुईं सीएम की पत्नी गीता धामी, आंसुओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल दुबई भेजी जाएगी उत्तराखंड की ट्राउट फिश, राज्य के मत्स्य उत्पादों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार