Spread the loveउत्तराखंड, 18 जनवरी 2026 (दैनिक प्रभातवाणी)उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पंचायत विभाग द्वारा रद्द किए गए VPDOs (Village Panchayat Development Officers) के अंतर‑जिला तबादलों को कानूनी रूप से सही ठहराते हुए पुनर्स्थापित कर दिया है। उच्च न्यायालय ने सरकार को इस मामले में तीन महीने के भीतर नया निर्णय लेने का निर्देश भी दिया है।हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि VPDOs के तबादले विभागीय नियमों और सेवा शर्तों के अनुरूप होने चाहिए। न्यायालय ने पाया कि पंचायत विभाग द्वारा पहले रद्द किए गए अंतर‑जिला ट्रांसफ़र प्रक्रिया में पर्याप्त औचित्य और कानूनी आधार नहीं था। इसलिए आदेश दिया गया कि सभी प्रभावित अधिकारियों के ट्रांसफ़र बहाल किए जाएँ।शासन ने इस मामले में तर्क दिया कि कुछ प्रशासनिक और स्थानीय परिस्थितियों के कारण ट्रांसफ़र रद्द करना आवश्यक था। लेकिन कोर्ट ने इसे अपर्याप्त ठहराते हुए कहा कि किसी भी निर्णय में नियम और कानून का पालन अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे मामलों में विभाग को उचित प्रक्रिया और आधार के साथ निर्णय लेना होगा।VPDOs की स्थिति पर उच्च न्यायालय के इस फैसले से पंचायत स्तर पर कार्यरत अधिकारियों में राहत की भावना है। अधिकारियों का कहना है कि अब वे अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में लौट कर अपने कार्यभार का निर्वहन कर सकेंगे। कई अधिकारियों ने कहा कि इससे ग्राम पंचायतों में योजनाओं और विकास कार्यों की गति भी सुचारू रूप से बढ़ेगी।उत्तराखंड राज्य के पंचायत विभाग ने आदेश प्राप्त होने के बाद कहा कि कोर्ट के निर्देश के अनुसार तीन महीने के भीतर नए निर्णय की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस दौरान सभी VPDOs अपने बहाल किए गए जिलों में कार्य करेंगे और सेवा नियमों का पालन करेंगे।विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश पंचायत स्तर पर प्रशासनिक स्थिरता और नियमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र में कार्य करने का अधिकार सुनिश्चित हुआ और भविष्य में किसी भी ट्रांसफ़र में कानूनी प्रक्रिया को प्राथमिकता देने का संदेश भी गया।हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं और पंचायत स्तर पर कामकाज में व्यवधान कम होने की उम्मीद है। अधिकारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि न्यायालय का यह कदम प्रशासनिक नियमों के पालन और लोकहित के दृष्टिकोण से समयोचित और उचित है। Post Views: 9 Post navigationचार धाम मंदिरों में मोबाइल और कैमरा प्रतिबंधित, श्रद्धालुओं को मिलेगा शांतिपूर्ण दर्शन नंदा देवी राजजात यात्रा 2026 स्थगित, अब 2027 में होगा ‘हिमालय का महाकुंभ’