Spread the loveदेहरादून, 13 सितम्बर 2025।उत्तराखंड सरकार ने राज्य की महत्वाकांक्षी होमस्टे योजना में अहम बदलाव का प्रस्ताव पेश किया है। सरकार का कहना है कि यह योजना केवल राज्य के स्थायी निवासियों तक सीमित होगी। पिछले कुछ वर्षों में बाहरी राज्यों के लोगों ने इस योजना का लाभ उठाकर इसे व्यावसायिक उद्देश्य में बदल दिया, जिससे इसका मूल मकसद प्रभावित होने लगा। अब सरकार चाहती है कि योजना अपने असली लक्ष्य—स्थानीय युवाओं को रोजगार और पलायन रोकने—को पूरा कर सके। योजना की शुरुआत और उद्देश्य उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए ग्रामीण पर्यटन एक बड़ी संभावनाओं वाला क्षेत्र है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढके पहाड़, तीर्थस्थल और सांस्कृतिक विविधता हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। लेकिन इसके बावजूद पहाड़ के गांव लगातार खाली होते चले गए क्योंकि लोगों के पास रोजगार के अवसर नहीं थे। इसी पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री होमस्टे योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य था— ग्रामीण परिवारों को आय का स्रोत उपलब्ध कराना। स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोड़ना। गांवों से पलायन को रोकना। पर्यटकों को गांव की संस्कृति और जीवनशैली से जोड़ना। सरकार ने योजना के तहत युवाओं को वित्तीय सहायता, बैंक ऋण में सब्सिडी, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया। मंशा साफ थी कि गांवों में खाली पड़े मकानों को मरम्मत करके होमस्टे में बदला जाए और इनसे स्थानीय लोग लाभान्वित हों। अब तक की उपलब्धियाँ योजना शुरू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम दिखे। अब तक राज्य में 3500 से अधिक होमस्टे पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें से सबसे अधिक अल्मोड़ा, टिहरी, चंपावत और चमोली जिलों में संचालित हो रहे हैं। हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। कई गांवों में जहां पहले पलायन से घर खाली हो गए थे, वहां फिर से लोग लौटने लगे। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पाँच सालों में होमस्टे योजना के चलते करीब दो लाख से अधिक पर्यटक सीधे ग्रामीण इलाकों में ठहरे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली। योजना का दुरुपयोग लेकिन जैसे-जैसे योजना लोकप्रिय होती गई, उसमें दुरुपयोग की घटनाएँ भी सामने आने लगीं। बाहरी राज्यों के लोग उत्तराखंड में जमीन और मकान खरीदकर इस योजना का फायदा उठाने लगे। उन्होंने बड़े पैमाने पर होमस्टे खोलकर इसे एक व्यावसायिक धंधे में बदल दिया। इससे दो बड़े नुकसान हुए— स्थानीय युवाओं को मिलने वाले अवसर कम हो गए। योजना का मूल उद्देश्य—गांवों में रोज़गार सृजन—कमज़ोर पड़ने लगा। कुछ जिलों में तो स्थिति यह हो गई कि बाहरी निवेशकों ने ही सबसे ज़्यादा होमस्टे खोल लिए। इससे स्थानीय परिवार हाशिए पर चले गए। सरकार का प्रस्ताव अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि योजना का लाभ केवल स्थायी निवास प्रमाणपत्र रखने वाले लोगों को मिलेगा। इसके लिए नीति में संशोधन की तैयारी की जा रही है। मुख्य प्रावधान होंगे— स्थायी निवासी ही सब्सिडी, प्रशिक्षण और बैंक ऋण की सुविधा ले सकेंगे। बाहरी राज्यों के लोग यदि होमस्टे खोलना चाहते हैं तो उन्हें सामान्य व्यावसायिक नियमों के तहत अनुमति लेनी होगी, लेकिन योजना का कोई लाभ नहीं मिलेगा। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देकर उनके लिए रोजगार के अवसर सुनिश्चित किए जाएंगे। स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया ग्रामीण और स्थानीय युवाओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। पौड़ी गढ़वाल के एक युवक का कहना है—“हमारे गांव से आधे से ज्यादा लोग देहरादून और दिल्ली चले गए। लेकिन जब मैंने होमस्टे शुरू किया तो मुझे यहीं रोजगार मिल गया। अगर बाहरी लोग यह काम करेंगे तो हमारे लिए कोई फायदा नहीं बचेगा। सरकार का फैसला सही है।” चमोली की एक महिला उद्यमी बताती हैं—“मेरे होमस्टे में पिछले साल 300 से ज्यादा पर्यटक आए। इससे मुझे आय भी हुई और गांव की पहचान भी बढ़ी। अगर यह योजना केवल हम जैसे लोगों के लिए रहेगी तो इसका वास्तविक लाभ मिलेगा।” बाहरी निवेशकों की दलील दूसरी ओर, बाहरी राज्यों से जुड़े निवेशकों ने इस प्रस्ताव पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि उन्होंने कानूनी तरीके से जमीन खरीदी और लाखों रुपये का निवेश किया है। अब अचानक नियम बदलने से उनकी पूंजी पर खतरा मंडरा रहा है। दिल्ली के एक निवेशक का कहना है—“हमने सोचा था कि राज्य सरकार पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। हमने यहां पैसा लगाया। लेकिन अब सरकार हमें योजना से बाहर कर रही है। इससे निवेशकों का भरोसा टूटेगा।” विशेषज्ञों की राय पर्यटन विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार को संतुलित नीति बनानी होगी। केवल स्थानीय लोगों को लाभ देना ज़रूरी है ताकि योजना का उद्देश्य पूरा हो। लेकिन बाहरी निवेश को पूरी तरह रोकना भी उचित नहीं होगा क्योंकि पर्यटन उद्योग में बड़ी पूंजी की आवश्यकता होती है। सरकार चाहे तो बाहरी निवेशकों को अलग श्रेणी में रख सकती है, उनसे अधिक टैक्स वसूल सकती है या उन्हें विशेष व्यावसायिक लाइसेंस दे सकती है। पर्यटन उद्योग पर असर इस प्रस्ताव से पर्यटन उद्योग पर दो तरह के असर पड़ सकते हैं। सकारात्मक असर : स्थानीय युवाओं की भागीदारी बढ़ेगी। गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा मिलेगा। नकारात्मक असर : बाहरी निवेश कम हो सकता है। बड़े पैमाने पर होमस्टे नेटवर्क की गति धीमी पड़ सकती है। चुनौतियाँ इस बदलाव के बाद सरकार को कई चुनौतियों का सामना भी करना होगा। गुणवत्ता नियंत्रण : केवल संख्या बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता और पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी। इन्फ्रास्ट्रक्चर : ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, इंटरनेट और स्वास्थ्य सुविधाएँ बेहतर करनी होंगी। प्रशिक्षण : स्थानीय लोगों को आतिथ्य, स्वच्छता और प्रबंधन का प्रशिक्षण देना ज़रूरी होगा। संतुलन : स्थानीय लोगों और बाहरी निवेशकों के बीच संतुलन बनाना होगा ताकि राज्य की छवि निवेश विरोधी न बने। भविष्य की संभावनाएँ यदि यह योजना सही दिशा में लागू की गई तो उत्तराखंड के गांव ग्रामीण पर्यटन के बड़े केंद्र बन सकते हैं। पर्यटक गांवों की संस्कृति, लोकगीत, नृत्य और भोजन का अनुभव करेंगे। गांवों में बाजार और शिल्प उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। पलायन रुकने के साथ-साथ लोग वापस अपने गांवों में लौट सकते हैं। दैनिक प्रभातवाणी उत्तराखंड सरकार का यह प्रस्ताव निश्चित रूप से स्थानीय युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए एक सकारात्मक पहल है। होमस्टे योजना का लाभ तभी सच्चे अर्थों में मिलेगा जब इसे उन लोगों तक सीमित रखा जाए जिनके लिए यह बनाई गई थी। हालांकि बाहरी निवेशकों के लिए वैकल्पिक नीति तैयार करना भी ज़रूरी होगा ताकि राज्य की छवि निवेश-विरोधी न बने। यह बदलाव केवल पर्यटन की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पलायन रोकने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और संस्कृति को संरक्षित करने की दिशा में भी एक अहम कदम साबित हो सकता है। ✍️ दैनिक प्रभातवाणी संवाददाता Post Views: 33 Post navigation बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए प्रशासन सख्त, पर बाहरी जिलों से जारी है मुर्गी और अंडों की आपूर्ति मानसून आपदा और 1200 करोड़ का पैकेज: हरीश रावत ने बताया नाकाफी