Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी | 11 जुलाई 2025 ऊर्जा और प्रशासनिक क्षेत्र में बड़ा सुधार: उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने भूकंपी ऊर्जा नीति और डिजिटल नवाचारों को दी मंजूरीदेहरादून। उत्तराखंड सरकार ने विकास और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भूकंपी (Geothermal) ऊर्जा नीति 2025, डिजिटल फॉरेंसिक प्रयोगशाला की स्थापना, तथा District Mineral नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इन सभी नीतिगत निर्णयों को प्रदेश के ऊर्जा आत्मनिर्भरता, प्रशासनिक पारदर्शिता और कानूनी सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। उत्तराखंड में पहली बार ‘भूकंपी ऊर्जा नीति’ लागूराज्य सरकार ने Geothermal Energy Policy 2025 को मंजूरी देकर भूकंपी ऊर्जा के दोहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह नीति उत्तराखंड को देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल कर देगी, जो प्राकृतिक रूप से उपलब्ध भूगर्भीय ऊर्जा स्रोतों का व्यावसायिक उपयोग करने जा रहे हैं।▪︎ क्या है भूकंपी ऊर्जा?भूकंपी ऊर्जा पृथ्वी की आंतरिक गर्मी से प्राप्त होती है, जो ज्वालामुखीय गतिविधियों और गर्म पानी के स्रोतों से जुड़ी होती है। उत्तराखंड में पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली जैसे जिलों में कई गर्म जल स्रोत (Hot Springs) मौजूद हैं, जिनका उपयोग बिजली उत्पादन, हीटिंग और अन्य औद्योगिक जरूरतों में किया जा सकता है।▪︎ नीति के उद्देश्य:वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देनास्थानीय रोजगार सृजनपर्यावरणीय संरक्षणऊर्जा लागत में कमीसरकार ने इस परियोजना के तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने की योजना भी बनाई है।डिजिटल फॉरेंसिक प्रयोगशाला: साइबर अपराध से निपटने का आधुनिक उपायउत्तराखंड सरकार ने राज्य की पहली डिजिटल फॉरेंसिक लैब की स्थापना की योजना को भी मंजूरी दी है। यह प्रयोगशाला देहरादून में स्थापित की जाएगी और इसका उद्देश्य साइबर अपराधों, डिजिटल धोखाधड़ी, डेटा उल्लंघनों, और सोशल मीडिया अपराधों की जांच को अधिक प्रभावी और तेज़ बनाना है।▪︎ विशेषताएँ:डिजिटल साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षणपुलिस व जांच एजेंसियों को तकनीकी सहायतासोशल मीडिया मॉनिटरिंग और फेक न्यूज़ पहचानसाइबर अपराधियों पर त्वरित कार्रवाईइस लैब के निर्माण से उत्तराखंड डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा और अन्य राज्यों के केस भी यहाँ जाँच के लिए भेजे जा सकेंगे।District Mineral Rules में संशोधन: पारदर्शी खनन व्यवस्था की ओरराज्य मंत्रिमंडल ने जिला खनिज नियमों (District Mineral Rules) में भी व्यापक संशोधन को मंजूरी दी है। खनिज संसाधनों के दोहन को पारदर्शी, न्यायसंगत और पर्यावरण-संवेदनशील बनाने के लिए ये बदलाव किए गए हैं।▪︎ मुख्य संशोधन बिंदु:खनन पट्टों की ई-नीलामी प्रणालीखनिज क्षेत्र से प्राप्त आय का स्थानीय विकास में उपयोगअवैध खनन पर सख्ती और GPS ट्रैकिंग सिस्टमपर्यावरणीय प्रभाव आंकलन अनिवार्यइसके अतिरिक्त, जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) की कार्यशैली को भी सुधारने के लिए गाइडलाइन लागू की जाएंगी, जिससे यह राशि स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के विकास में बेहतर उपयोग हो सके।पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार की दिशा में पहलइन तीनों पहलों से सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि उत्तराखंड अब पारंपरिक प्रशासनिक सोच से आगे निकलकर वैज्ञानिक, तकनीकी और पर्यावरणीय दृष्टिकोण को अपनाने की दिशा में बढ़ रहा है। खासकर ऊर्जा, खनन और साइबर क्षेत्र में यह परिवर्तन प्रशासन की दक्षता और जनविश्वास को नई ऊँचाई देगा। विशेषज्ञों की रायऊर्जा और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंपी नीति से राज्य में हरित ऊर्जा की नई संभावनाएं खुलेंगी, जिससे भविष्य में हाइड्रो पावर पर निर्भरता घटेगी। वहीं, डिजिटल फॉरेंसिक लैब साइबर युग की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है, जिसका फायदा न केवल कानून व्यवस्था को मिलेगा बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को भी गति मिलेगी।खनन क्षेत्र में सुधार को स्थानीय पारदर्शिता, राजस्व में वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग से जोड़कर देखा जा रहा है।दैनिक प्रभातवाणी उत्तराखंड सरकार द्वारा पारित भूकंपी ऊर्जा नीति, डिजिटल फॉरेंसिक प्रयोगशाला, और जिला खनिज नियमों में संशोधन जैसे निर्णय राज्य के विकास की नई परिभाषा प्रस्तुत करते हैं। इन पहलों से न केवल ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में उत्तराखंड को मजबूती मिलेगी, बल्कि यह राज्य को हरित, पारदर्शी और डिजिटली सशक्त प्रदेश की ओर अग्रसर करेगा। Post Views: 181 Post navigationHaldwani: 15 year old girl gang raped, Banbhoolpura में बवाल, 8 आरोपी गिरफ्तार Sindoor Mango Uttarakhand – सितंबर में बिकेगा जब बाजार में आम नहीं होगा जीबी पंत विश्वविद्यालय ने विकसित की ‘सिंदूर’ आम की अनोखी किस्म