Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी | जिला ब्यूरोरुद्रप्रयाग | 5 फरवरी 2026रुद्रप्रयाग जिले में एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष ने दिल दहला देने वाली घटना को जन्म दिया है। जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में बाघ के हमले में एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने आसपास के गांवों के स्कूलों को एहतियातन आज तक बंद रखने का फैसला किया है।जानकारी के अनुसार, बच्चा रोजमर्रा की तरह घर के पास ही मौजूद था, तभी घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उस पर हमला कर दिया। घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बाघ बच्चे को गंभीर रूप से घायल कर चुका था। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। बच्चे को बचाने की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और परिजनों को सांत्वना दी गई। प्रशासन ने मृतक परिवार को नियमानुसार सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। वहीं, घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना हुआ है। लोग बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर निकलने से रोक रहे हैं।वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इलाके में बाघ की गतिविधियों की पहले भी सूचनाएं मिल रही थीं। वन क्षेत्र से सटे गांवों में जंगल और आबादी की दूरी कम होने के कारण ऐसे हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और बाघ की निगरानी के लिए ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर पिंजरा लगाने या बाघ को पकड़ने की कार्रवाई भी की जा सकती है।बच्चे की मौत के बाद ग्रामीणों में रोष है। उनका कहना है कि वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों की सुरक्षा के लिए स्थायी इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।जिला प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित गांवों के सभी स्कूलों को आज तक बंद रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों को अकेले बाहर न भेजें और जंगल की ओर जाने से बचें। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें लगातार इलाके में गश्त कर रही हैं और लोगों को सतर्क किया जा रहा है।यह घटना एक बार फिर उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है। जंगलों के सिमटने और आबादी के विस्तार के बीच इंसान और वन्यजीव आमने-सामने आ रहे हैं, जिसका खामियाजा निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। दैनिक प्रभातवाणी इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगा। Post Views: 7 Post navigationमतदाता पहचान और वोटर लिस्ट अपडेट का मामला: 19 लाख से अधिक मतदाता अभी भी ‘अनमैप्ड’, विशेष गहन संशोधन से सुलझेगा मुद्दा औली में विंटर स्पोर्ट्स आयोजन की तैयारी तेज, प्रशासन जुटा अंतिम रूप देने में
दैनिक प्रभातवाणी | जिला ब्यूरोरुद्रप्रयाग | 5 फरवरी 2026रुद्रप्रयाग जिले में एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष ने दिल दहला देने वाली घटना को जन्म दिया है। जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में बाघ के हमले में एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने आसपास के गांवों के स्कूलों को एहतियातन आज तक बंद रखने का फैसला किया है।जानकारी के अनुसार, बच्चा रोजमर्रा की तरह घर के पास ही मौजूद था, तभी घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उस पर हमला कर दिया। घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बाघ बच्चे को गंभीर रूप से घायल कर चुका था। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। बच्चे को बचाने की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और जिला प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और परिजनों को सांत्वना दी गई। प्रशासन ने मृतक परिवार को नियमानुसार सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। वहीं, घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना हुआ है। लोग बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर निकलने से रोक रहे हैं।वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इलाके में बाघ की गतिविधियों की पहले भी सूचनाएं मिल रही थीं। वन क्षेत्र से सटे गांवों में जंगल और आबादी की दूरी कम होने के कारण ऐसे हादसे लगातार बढ़ रहे हैं। विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है और बाघ की निगरानी के लिए ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर पिंजरा लगाने या बाघ को पकड़ने की कार्रवाई भी की जा सकती है।बच्चे की मौत के बाद ग्रामीणों में रोष है। उनका कहना है कि वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों की सुरक्षा के लिए स्थायी इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।जिला प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित गांवों के सभी स्कूलों को आज तक बंद रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों को अकेले बाहर न भेजें और जंगल की ओर जाने से बचें। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें लगातार इलाके में गश्त कर रही हैं और लोगों को सतर्क किया जा रहा है।यह घटना एक बार फिर उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर करती है। जंगलों के सिमटने और आबादी के विस्तार के बीच इंसान और वन्यजीव आमने-सामने आ रहे हैं, जिसका खामियाजा निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है। दैनिक प्रभातवाणी इस संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखेगा।