पर्यावरण मुद्दा – 83,000 से अधिक पेड़ों की कटाई पर विवाद

देहरादून | उत्तराखंड
दिनांक: 15 फरवरी 2026
दैनिक प्रभातवाणी
राज्य में विकास परियोजनाओं के नाम पर हो रही अंधाधुंध पेड़ कटाई एक बार फिर गंभीर बहस का विषय बन गई है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी में खुलासा हुआ है कि उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और चौड़ीकरण के लिए 83,000 से अधिक पेड़ों की कटाई की जा चुकी है। इस खुलासे के बाद पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों में गहरी चिंता देखी जा रही है।
RTI से सामने आए आंकड़ों के अनुसार, राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़क परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर हरे-भरे पेड़ों को हटाया गया, लेकिन इसके बदले किए जाने वाले अनिवार्य पौधरोपण कार्यक्रमों में भारी अंतर पाया गया है। नियमों के मुताबिक प्रत्येक कटे हुए पेड़ के बदले कई नए पौधे लगाए जाने चाहिए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे मेल नहीं खाती। कई स्थानों पर पौधरोपण केवल कागज़ी प्रक्रिया बनकर रह गया, जबकि लगाए गए पौधों की देखरेख और उनके जीवित रहने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखाई देती।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहाड़ी राज्य में पेड़ों की कटाई का सीधा असर पारिस्थितिकी संतुलन पर पड़ रहा है। जंगलों की कमी से मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है, जल स्रोत सूख रहे हैं और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि विकास योजनाओं को मंजूरी देते समय पर्यावरणीय प्रभावों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
इस पूरे मामले में सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियाँ कटे पेड़ों और लगाए गए पौधों का स्वतंत्र ऑडिट कराएं, ताकि सच्चाई सामने आ सके। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसी भी परियोजना के लिए पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं बढ़ाई गई, तो वे जन आंदोलन का रास्ता भी अपनाएंगे।