उत्तराखंड में भारत-जापान का संयुक्त सैन्य अभ्यास “धर्मा गार्जियन 2026” शुरू
ajaysemalty98 February 24, 2026 0
दैनिक प्रभातवाणी
दिनांक: 24 फरवरी 2026 | स्थान: उत्तराखंड
उत्तराखंड की धरती एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग की महत्वपूर्ण गतिविधि की गवाह बनी है। भारत और जापान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास “धर्मा गार्जियन 2026” का आयोजन 24 फरवरी से शुरू हो गया है। यह सैन्य अभ्यास 9 मार्च तक चलेगा और इस दौरान दोनों देशों की सेनाएं विभिन्न युद्ध कौशल, रणनीतिक समन्वय और आधुनिक सैन्य तकनीकों का साझा अभ्यास करेंगी। इस अभ्यास को भारत और जापान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
इस संयुक्त अभ्यास में भारतीय सेना और जापान की ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के लगभग 120-120 सैनिक भाग ले रहे हैं। दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के साथ मिलकर युद्ध क्षेत्र में समन्वय, आतंकवाद विरोधी अभियानों की रणनीति, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ऑपरेशन और आधुनिक सैन्य अभ्यासों का प्रशिक्षण ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभ्यास से दोनों सेनाओं की संयुक्त कार्रवाई की क्षमता और आपसी समझ को मजबूती मिलती है।
उत्तराखंड को इस अभ्यास के लिए इसलिए भी चुना गया है क्योंकि यहां का भौगोलिक वातावरण पर्वतीय और चुनौतीपूर्ण है, जो वास्तविक युद्ध परिस्थितियों जैसा अनुभव प्रदान करता है। इस इलाके में सैनिकों को कठिन मौसम, ऊंचाई और सीमित संसाधनों के बीच ऑपरेशन करने का प्रशिक्षण मिलता है। ऐसे अभ्यास से भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में दोनों देशों की सेनाएं बेहतर तालमेल के साथ कार्रवाई कर सकती हैं।
भारत और जापान के बीच रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ा रहे हैं। संयुक्त सैन्य अभ्यास इसी रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अभ्यास से सैन्य तकनीक, रणनीति और अनुभव का आदान-प्रदान होता है, जिससे दोनों देशों को लाभ मिलता है।
सैन्य अधिकारियों के अनुसार इस अभ्यास में कई प्रकार के सामरिक प्रशिक्षण शामिल किए गए हैं। इसमें शहरी क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान, जंगल और पहाड़ी इलाकों में सर्च ऑपरेशन, आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल का अभ्यास और आपदा के समय संयुक्त राहत अभियान की तैयारी भी शामिल है। सैनिकों को एक-दूसरे की कार्यशैली और सैन्य प्रक्रियाओं को समझने का अवसर भी मिल रहा है।
स्थानीय स्तर पर भी इस अभ्यास को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। उत्तराखंड लंबे समय से भारतीय सेना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और यहां कई सैन्य संस्थान तथा प्रशिक्षण केंद्र मौजूद हैं। ऐसे अंतरराष्ट्रीय अभ्यास से राज्य की रणनीतिक और सैन्य महत्वता और अधिक बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग एशिया क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्य, कानून आधारित व्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में ऐसे और भी संयुक्त अभ्यास आयोजित किए जाने की संभावना है।
“धर्मा गार्जियन 2026” न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत और जापान के बीच भरोसे, सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करता है। इस अभ्यास के माध्यम से दोनों देश यह संदेश भी दे रहे हैं कि वे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
