ईरान युद्ध का असर: अब 14.2 किलो नहीं, 10 किलो में मिलेगा घरेलू गैस सिलेंडर? सरकार कर रही बड़ा विचार
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नई दिल्ली से सामने आ रही बड़ी खबर ने आम लोगों की रसोई पर सीधा असर डालने की आशंका पैदा कर दी है। मध्य पूर्व में जारी तनाव, खासकर ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने अब भारत की गैस सप्लाई पर दबाव बढ़ा दिया है। हालात इतने गंभीर होते जा रहे हैं कि सरकार घरेलू एलपीजी सिलेंडर के वजन में कटौती करने जैसे बड़े फैसले पर विचार कर रही है।

स्थिति यह बनती दिख रही है कि अब तक 14.2 किलो में मिलने वाला घरेलू गैस सिलेंडर घटाकर 10 किलो तक किया जा सकता है, ताकि सीमित सप्लाई के बावजूद ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक गैस पहुंचाई जा सके। यह प्रस्ताव अभी विचाराधीन है, लेकिन अगर लागू होता है तो इसका असर देश के करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

इस संभावित बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति संकट है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है और इसका अधिकांश हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। मौजूदा युद्ध के कारण इस अहम समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ गया है, जिससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और गैस की सप्लाई अनिश्चित हो गई है। आंकड़ों के अनुसार हाल के दिनों में देश में आने वाली गैस की मात्रा काफी कम हो गई है, जो चिंता का विषय है।

सरकार की रणनीति यह है कि कम गैस उपलब्ध होने के बावजूद हर घर तक इसकी पहुंच बनी रहे। यदि 10 किलो का सिलेंडर लागू होता है तो उसकी कीमत भी उसी अनुपात में कम रखी जाएगी, ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उदाहरण के तौर पर अगर 14.2 किलो सिलेंडर ₹900 के आसपास मिलता है तो 10 किलो सिलेंडर लगभग ₹600-650 के बीच हो सकता है। इसके साथ ही ग्राहकों को भ्रम से बचाने के लिए इन सिलेंडरों पर अलग पहचान, जैसे विशेष स्टिकर या रंगीन सील, लगाई जा सकती है।

इस बीच सरकार ने सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए कुछ कड़े कदम भी उठाए हैं। अब गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतराल बढ़ा दिया गया है, जिससे लोग बार-बार बुकिंग न कर सकें और सभी को समान रूप से गैस मिल सके। साथ ही हाल ही में एलपीजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे महंगाई का असर सीधे आम आदमी तक पहुंच रहा है। प्राथमिकता अब घरेलू उपभोक्ताओं को दी जा रही है, जबकि कमर्शियल उपयोग को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और विशेषज्ञों की चिंताएं भी सामने आ रही हैं। उनका मानना है कि अचानक सिलेंडर के वजन में बदलाव से लोगों में भ्रम और नाराजगी पैदा हो सकती है, खासकर ऐसे समय में जब कई राज्यों में चुनावी माहौल बन रहा है। इसके अलावा तकनीकी स्तर पर भी यह बदलाव आसान नहीं है, क्योंकि गैस बॉटलिंग प्लांट्स को नए वजन के अनुसार फिर से सेट करना होगा, जो समय और संसाधन दोनों मांगता है।

कुल मिलाकर यह साफ है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर अब भारत के आम नागरिकों तक पहुंचने लगा है। आने वाले दिनों में सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह फैसला सीधे हर घर की रसोई और बजट को प्रभावित करेगा।

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