धामी कैबिनेट के 18 बड़े फैसले: परिवहन से लेकर मदरसा सुधार और कुंभ 2027 तक, उत्तराखंड के भविष्य की नई दिशा तय
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उत्तराखंड सरकार ने एक बार फिर विकास और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है। यह बैठक केवल औपचारिक निर्णयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें राज्य के भविष्य की आधारशिला रखने वाले कई अहम मुद्दों पर ठोस फैसले लिए गए। इन निर्णयों का असर आम जनता, छात्रों, कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों और व्यापारिक वर्ग तक व्यापक रूप से देखने को मिलेगा।

कैबिनेट के फैसलों में परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने, शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी और मजबूत करने, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने तथा प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। खासतौर पर आगामी कुंभ मेला 2027 को ध्यान में रखते हुए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े वित्तीय निर्णय लिए गए हैं, जो राज्य के पर्यटन और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

परिवहन क्षेत्र में सुधार को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने राज्यभर में पार्किंग व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए ‘उत्तराखंड मोटर वाहन (संशोधन) नियमावली, 2026’ को मंजूरी दी है। लंबे समय से शहरी क्षेत्रों में अव्यवस्थित पार्किंग एक बड़ी समस्या बनी हुई थी, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती रही है। नए नियमों के लागू होने के बाद पार्किंग शुल्क की व्यवस्था से न केवल यातायात नियंत्रण में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय निकायों की आय में भी वृद्धि होने की संभावना है। इसके साथ ही परिवहन विभाग को सशक्त बनाने के लिए 250 नई बसों की खरीद को हरी झंडी दी गई है। हालांकि जीएसटी दरों के कारण फिलहाल 109 बसों की खरीद तत्काल की जाएगी। यह निर्णय ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगामी कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर नजर आ रही है। हरिद्वार में आयोजित होने वाले इस भव्य धार्मिक आयोजन के लिए 31 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस राशि का उपयोग सड़कों, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए वित्तीय अधिकारों का विकेंद्रीकरण भी किया गया है, जिसके तहत मेला अधिकारी को 1 करोड़ रुपये तक और गढ़वाल आयुक्त को 5 करोड़ रुपये तक के कार्यों को स्वीकृति देने का अधिकार दिया गया है। इससे निर्माण कार्यों में तेजी आएगी और समय पर तैयारियां पूरी हो सकेंगी।

शिक्षा क्षेत्र में सुधार के तहत सरकार ने मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश के 452 मदरसों को आधिकारिक मान्यता देने का फैसला किया गया है। इसके तहत कक्षा 1 से 8 तक के मदरसों को जिला स्तर की समिति से मान्यता प्राप्त करनी होगी, जबकि कक्षा 9 से 12 तक के मदरसों के लिए उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता अनिवार्य कर दी गई है। यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और छात्रों को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी अहम निर्णय लिया गया है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की नियमावली में संशोधन कर भर्ती प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है। पिछले कुछ वर्षों में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवालों के मद्देनजर यह फैसला युवाओं के विश्वास को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।

सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में पूर्व सैनिकों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह निर्णय उन सैनिकों के सम्मान और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन्होंने देश की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अलावा आबकारी नीति में भी संशोधन करते हुए 6 प्रतिशत की दर को मंजूरी दी गई है, जिससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद है।

वन विभाग से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। वन दरोगा भर्ती के लिए आयु सीमा और नियमों में संशोधन के साथ ‘नो-मैन पॉलिसी’ को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य वन सीमाओं को स्पष्ट और सुरक्षित बनाना है। इससे अवैध अतिक्रमण और वन संसाधनों के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

औद्योगिक क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए कुछ दरों में भी संशोधन किया गया है, जिसमें ₹7 प्रति कुंतल की दर को बढ़ाकर ₹8 कर दिया गया है। यह कदम राज्य की औद्योगिक नीति को संतुलित करने और राजस्व बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है। इसके साथ ही कर्मचारियों के लिए एकीकृत पेंशन योजना और सख्त भूमि कानून को लेकर भी चर्चा हुई, जिस पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इन विषयों पर विस्तृत घोषणा भविष्य में की जा सकती है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो धामी सरकार के ये फैसले केवल तात्कालिक समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दीर्घकालिक विकास की दिशा में एक ठोस रणनीति का हिस्सा हैं। परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित करने, शिक्षा को बेहतर बनाने, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और प्रशासनिक सुधारों को लागू करने के ये कदम उत्तराखंड को एक सशक्त और विकसित राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

इन फैसलों का असर आने वाले समय में राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार के अवसरों और सामाजिक ढांचे पर साफ तौर पर दिखाई देगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन निर्णयों को कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू कर पाती है, क्योंकि किसी भी नीति की सफलता उसके क्रियान्वयन पर ही निर्भर करती है।