Spread the love देहरादून नगर निगम बोर्ड की हालिया बैठक में लिए गए कई निर्णय अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गए हैं। उत्तराखंड की राजनीति में हलचल उस समय तेज हो गई जब पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता Harish Rawat ने इन फैसलों पर कड़ा विरोध जताते हुए सरकार और नगर निगम प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। हरीश रावत ने कहा है कि नगर निगम की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव बिना पर्याप्त चर्चा और पारदर्शिता के पारित कर दिए गए, जो सीधे तौर पर जनहित के खिलाफ प्रतीत होते हैं। उनका आरोप है कि विपक्षी पार्षदों की आवाज को उचित मंच नहीं दिया गया और निर्णय प्रक्रिया में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की गई। सबसे बड़ा विवाद अतिक्रमण और ध्वस्तीकरण से जुड़े नए नियमों को लेकर सामने आया है। नगर निगम द्वारा तय की गई नई व्यवस्था के अनुसार अब अतिक्रमण मामलों में एक सप्ताह के भीतर नोटिस और एक महीने के भीतर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए रावत ने कहा कि यह नीति जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करती है और इससे आम लोगों पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा। इसके साथ ही किन्नर समुदाय से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। रावत ने इन निर्णयों को विवादास्पद बताते हुए कहा कि सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखे बिना ऐसे कदम उठाना उचित नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार पर विकास कार्यों को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजधानी देहरादून में सड़कों की हालत लगातार खराब होती जा रही है, जल निकासी व्यवस्था कमजोर है और बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। उनके अनुसार, सरकार विकास के दावों के विपरीत जमीनी स्तर पर प्रभावी काम करने में असफल साबित हो रही है। आरक्षण के मुद्दे पर भी रावत ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ हालिया फैसले आरक्षित वर्गों के हितों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे सामाजिक संतुलन पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा विवाद आगामी नगर निकाय चुनावों के मद्देनजर काफी अहम हो सकता है। कांग्रेस की ओर से इसे एक आक्रामक राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए वह शहरी निकायों में जनसमर्थन बढ़ाने की कोशिश कर रही है। वहीं, दूसरी ओर नगर निगम प्रशासन का कहना है कि सभी फैसले नियमों और विकास की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया का उद्देश्य शहर को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना है। फिलहाल इस पूरे मामले ने उत्तराखंड की सियासत को एक बार फिर गर्म कर दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है। Post Views: 12 Post navigation टिहरी झील में अचानक मौसम बिगड़ने से पर्यटकों के फंसने की घटना सामने आई है, जिससे क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। उत्तराखंड में मौसम का कहर: कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से जनजीवन प्रभावित, IMD ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट