बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का बड़ा फैसला, दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को मिलेगी दर्शन में प्राथमिकता
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उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधामों में शामिल बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। समिति के नए फैसले के अनुसार अब प्रत्येक दर्शन स्लॉट में 50 दिव्यांग और 70 वरिष्ठ नागरिक श्रद्धालुओं को प्राथमिकता के आधार पर दर्शन करवाए जाएंगे।

चारधाम यात्रा के दौरान हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम पहुंचते हैं। भारी भीड़ और लंबी कतारों के कारण सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं को होती थी। कई बार घंटों तक लाइन में खड़े रहने के कारण श्रद्धालुओं की तबीयत भी बिगड़ जाती थी। इसी समस्या को देखते हुए मंदिर समिति ने यह विशेष व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

समिति के अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था दर्शन प्रक्रिया को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। अब निर्धारित स्लॉट में अलग से प्राथमिकता श्रेणी बनाई जाएगी, जिसके तहत दिव्यांग और वृद्ध श्रद्धालुओं को सामान्य भीड़ से अलग होकर अपेक्षाकृत कम समय में दर्शन का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें धक्का-मुक्की और लंबी प्रतीक्षा जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है।

बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए मंदिर परिसर और कतार प्रबंधन में भी बदलाव किए जा रहे हैं। विशेष सहायता डेस्क, अलग प्रवेश व्यवस्था और कर्मचारियों की अतिरिक्त तैनाती जैसे कदमों पर भी काम किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन का कहना है कि यात्रा सीजन के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्था को लगातार मॉनिटर किया जाएगा।

चारधाम यात्रा में इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में मंदिर समिति का यह निर्णय मानवीय संवेदनाओं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और तीर्थ यात्रियों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से दर्शन करने में मदद मिलेगी।

मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि सभी यात्री नियमों का पालन करें और प्राथमिकता श्रेणी के श्रद्धालुओं को सुविधा देने में सहयोग करें। प्रशासन का मानना है कि इससे दर्शन व्यवस्था अधिक अनुशासित और सुचारु बनाई जा सकेगी।

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