Spread the love

देहरादून। उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है कि स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, जॉलीग्रांट के मेडिकल फिजिक्स विभाग से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. मुकेश प्रसाद बिजल्वाण के शोध कार्य को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्था UNSCEAR की वैश्विक रिपोर्ट में स्थान मिला है। यह उपलब्धि न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। रेडिएशन और उसके मानव स्वास्थ्य पर प्रभावों से जुड़े उनके शोध पत्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने के बाद वैज्ञानिक जगत में उनकी विशेष चर्चा हो रही है।

डॉ. मुकेश प्रसाद बिजल्वाण पिछले कई वर्षों से हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक रेडियोधर्मिता, विकिरण स्तर, राडॉन गैस तथा पर्यावरणीय रेडिएशन के प्रभावों पर शोध कर रहे हैं। उनका शोध विशेष रूप से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मिट्टी, जल और वातावरण में मौजूद प्राकृतिक विकिरण तथा उसके स्वास्थ्य प्रभावों को समझने पर केंद्रित रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र भूगर्भीय रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं और यहां प्राकृतिक रेडियोधर्मिता पर अध्ययन भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

डॉ. बिजल्वाण के शोध को संयुक्त राष्ट्र वैज्ञानिक समिति ऑन द इफेक्ट्स ऑफ एटॉमिक रेडिएशन यानी UNSCEAR की रिपोर्ट में शामिल किया जाना इस बात का संकेत है कि उनका कार्य अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मानकों पर खरा उतरा है। UNSCEAR दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थाओं में मानी जाती है, जो आयनकारी विकिरण के मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभावों का अध्ययन करती है। इसकी रिपोर्टों का उपयोग विश्वभर की सरकारें, स्वास्थ्य एजेंसियां और परमाणु सुरक्षा संस्थान रेडिएशन सुरक्षा मानक तैयार करने में करते हैं।

वैज्ञानिक समुदाय के अनुसार किसी भारतीय शोधकर्ता के अध्ययन का UNSCEAR जैसी संस्था की रिपोर्ट में शामिल होना अत्यंत प्रतिष्ठित उपलब्धि मानी जाती है, क्योंकि आमतौर पर ऐसी रिपोर्टों में अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे देशों के शोध कार्यों का दबदबा रहता है। ऐसे में उत्तराखंड के वैज्ञानिक का शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जाना भारत के वैज्ञानिक योगदान की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

डॉ. मुकेश प्रसाद बिजल्वाण का शोध कार्य केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका संबंध सीधे मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा से भी है। उनके अध्ययन भविष्य में रेडिएशन सुरक्षा, कैंसर जोखिम मूल्यांकन, पर्यावरण संरक्षण तथा स्वास्थ्य नीतियों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच इस तरह का शोध आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण होगा।

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार डॉ. बिजल्वाण लंबे समय से रिसर्च और अकादमिक क्षेत्र में सक्रिय हैं तथा उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनकी इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गौरव का विषय बताया है।

वैज्ञानिक जगत का मानना है कि इस उपलब्धि से न केवल उत्तराखंड में हो रहे शोध कार्यों को नई पहचान मिलेगी, बल्कि युवा शोधार्थियों को भी विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में शामिल होना किसी भी वैज्ञानिक के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीयता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।