Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी | जौलीग्रांट/देहरादून देहरादून जनपद के थानों क्षेत्र में स्थित जामा मस्जिद और उससे जुड़े निर्माण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा कथित अनाधिकृत निर्माण के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई, न्यायालयी कार्यवाही और विभिन्न संगठनों के विरोध प्रदर्शनों ने इस मामले को राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। क्या है पूरा मामला? स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार थानों क्षेत्र में स्थित एक भवन के निर्माण और उसके उपयोग को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। आरोप है कि भवन के कुछ हिस्सों का निर्माण बिना आवश्यक स्वीकृतियों और मानचित्र की मंजूरी के किया गया। इस संबंध में एमडीडीए ने संबंधित पक्ष से दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था। प्राधिकरण का कहना है कि निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की गई और नियमानुसार नोटिस जारी किए गए। बताया जाता है कि आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत न किए जाने के बाद भवन के कुछ हिस्सों पर सीलिंग की कार्रवाई भी की गई। हाल में जारी नोटिस के बाद एक बार फिर इस मामले ने गति पकड़ ली है। एमडीडीए की कार्रवाई पर प्रशासन का रुख एमडीडीए अधिकारियों के अनुसार विकास प्राधिकरण क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण निर्धारित भवन उपविधियों और स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप होना आवश्यक है। यदि कोई निर्माण बिना अनुमति के पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नोटिस, सीलिंग अथवा अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि इस मामले में भी कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है और अंतिम निर्णय उपलब्ध दस्तावेजों, नियमों तथा न्यायालय के आदेशों के आधार पर लिया जाएगा। हाई कोर्ट में पहुंचा मामला मामले से जुड़े पक्ष द्वारा उत्तराखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया गया। रिपोर्टों के अनुसार याचिका में एमडीडीए की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी और राहत की मांग की गई थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार न्यायालय ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अदालत ने अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में नियमों के अनुपालन को महत्वपूर्ण बताया और कानून के दायरे में कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। हाई कोर्ट के निर्णय से जुड़े प्रमुख बिंदु (रिपोर्टों के अनुसार) • न्यायालय ने तत्काल राहत देने से इनकार किया। • निर्माण की वैधता से जुड़े दस्तावेजों को महत्वपूर्ण माना गया। • भवन निर्माण नियमों के पालन पर जोर दिया गया। • संबंधित पक्ष को वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करने की आवश्यकता बताई गई। • विकास प्राधिकरण की कार्रवाई को प्रारंभिक स्तर पर चुनौती देने के पर्याप्त आधार न्यायालय को नहीं मिले। (नोट: न्यायालय के आदेश की आधिकारिक प्रति के आधार पर ही अंतिम कानूनी निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।) विरोध प्रदर्शन और स्थानीय प्रतिक्रिया मामले को लेकर क्षेत्र के कुछ सामाजिक और हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि किसी निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो प्रशासन को निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए। प्रदर्शनों के दौरान विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपे। कुछ स्थानों पर पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से बैरिकेडिंग कर भीड़ को नियंत्रित किया। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। क्षेत्र में बढ़ाई गई सुरक्षा स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए थानों और जौलीग्रांट क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन लगातार हालात की निगरानी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शांति और सौहार्द बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौके पर राजस्व, पुलिस और विकास प्राधिकरण के अधिकारी संयुक्त रूप से स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। किसी भी अफवाह या भ्रामक सूचना से बचने की अपील भी की गई है। आगे क्या? अब सभी की निगाहें एमडीडीए की आगामी कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। यदि निर्माण संबंधी दस्तावेजों, अनुमतियों और नियमों को लेकर कोई नया तथ्य सामने आता है तो उसके आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी। फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और किसी भी निर्णय को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही लागू किया जाएगा। Post Views: 3 Post navigation DLD प्रशिक्षुओं की शिक्षा मंत्री से मुलाकात, मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन