72 घंटे में हरिद्वार पुलिस का बड़ा खुलासा, अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़, 2 मासूम सकुशल बरामद
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हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस ने एक बार फिर अपनी तत्परता, पेशेवर जांच और प्रभावी कार्यशैली का परिचय देते हुए महज 72 घंटे के भीतर अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का पर्दाफाश कर दो मासूम बच्चों को सकुशल बरामद करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस कार्रवाई में दो महिलाओं सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की इस उपलब्धि से एक ओर जहां पीड़ित परिवारों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर मानव तस्करी और बच्चा चोरी जैसे संगठित अपराधों के खिलाफ कानून व्यवस्था की मजबूती भी सामने आई है।

कनखल क्षेत्र के बैरागी कैंप स्थित झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र से तीन वर्षीय मासूम बच्ची राधिका के अपहरण की सूचना मिलने के बाद हरिद्वार पुलिस तत्काल सक्रिय हो गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह के निर्देशन में विशेष टीमों का गठन किया गया और जांच को कई स्तरों पर आगे बढ़ाया गया। पुलिस टीमों ने दिन-रात मेहनत करते हुए सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया तथा विभिन्न राज्यों में संभावित ठिकानों पर दबिश दी।

लगातार बढ़ते पुलिस दबाव के कारण आरोपी बच्ची को दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन क्षेत्र में छोड़ने पर मजबूर हो गए, जहां से पुलिस ने उसे सकुशल बरामद कर लिया। जांच में सामने आया कि बच्ची को राजस्थान में बेचने की तैयारी चल रही थी और इसके लिए सौदेबाजी भी शुरू हो चुकी थी।

पूछताछ के दौरान पुलिस को एक और चौंकाने वाली जानकारी मिली। आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने 24 मई को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से डेढ़ वर्षीय कार्तिक नामक बच्चे का भी अपहरण किया था। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले से उस बच्चे को भी सुरक्षित बरामद कर लिया। इस प्रकार पुलिस ने दो मासूम बच्चों को अपराधियों के चंगुल से मुक्त कर उनके परिवारों को सौंपने में सफलता प्राप्त की।

मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद आकिल, नसीमा, जुल्फिकार, धर्मेंद्र कुमार, प्रीति शर्मा और शिवा सिंह के रूप में हुई है। पुलिस जांच में पता चला है कि गिरोह की जड़ें उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक फैली हुई हैं। गिरफ्तार आरोपियों में अमरोहा और मुजफ्फरनगर क्षेत्र के दो विवाहित जोड़े भी शामिल हैं, जो गिरोह के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह बच्चों का अपहरण कर उन्हें निसंतान और संपन्न दंपतियों को बेचने का काम करता था। आरोपी बच्चों को अपना रिश्तेदार अथवा अनाथ बताकर उनकी खरीद-फरोख्त करते थे। बच्चों की कीमत दो लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक तय की जाती थी। बदायूं में बरामद बच्चे का सौदा लगभग डेढ़ लाख रुपये में किया गया था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरोह पूरी तरह संगठित तरीके से काम करता था। गिरोह के कुछ सदस्य बच्चों की रेकी और चोरी करते थे, जबकि अन्य सदस्य उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का कार्य करते थे। कुछ आरोपी ग्राहकों की तलाश करते थे और बच्चों की कीमत तय करने के बाद सौदेबाजी को अंजाम देते थे। आवश्यकता पड़ने पर गिरोह के सदस्य बच्चों के नकली माता-पिता बनकर भी पेश होते थे ताकि किसी को शक न हो।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि गिरोह में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। वे बच्चों को संभालने, खरीदारों से संपर्क बनाने तथा सौदे को अंतिम रूप देने का काम करती थीं। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें भी कानून के दायरे में लाया जा सके।

पूरे ऑपरेशन की निगरानी स्वयं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह द्वारा की जा रही थी। विभिन्न टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां देकर लगातार कार्रवाई की समीक्षा की गई। पुलिस की इसी रणनीति और समन्वित प्रयासों का परिणाम रहा कि बेहद कम समय में इस गंभीर मामले का सफल खुलासा हो सका।

एसएसपी नवनीत सिंह ने इस सफलता पर कहा कि यह वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि है। पुलिस ने एक पीड़ित मां से किया गया वादा पूरा किया है और दोनों मासूम बच्चों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि बच्चों की तस्करी और अपहरण जैसे अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

हरिद्वार पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक, मजबूत नेतृत्व और समर्पित टीमवर्क के बल पर गंभीर से गंभीर अपराधों का भी शीघ्र खुलासा किया जा सकता है। साथ ही यह संदेश भी स्पष्ट रूप से गया है कि अपराधियों के लिए अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है और कानून से बच पाना आसान नहीं होगा।

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