Spread the loveदेहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून में आयोजित ‘संविधान हत्या दिवस’ कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि यह दिन देशवासियों को संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और मौलिक अधिकारों की रक्षा के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आपातकाल के विरोध में जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों को शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के साहस, त्याग और संघर्ष के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पुनः स्थापित हो सकी। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए अनेक लोगों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की कीमत पर भी लोकतांत्रिक मूल्यों को जीवित रखा। मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि सामान्य परिस्थितियों में नागरिकों को लोकतंत्र के महत्व का उतना आभास नहीं होता, लेकिन जब उनके अधिकारों को सीमित या समाप्त कर दिया जाता है, तब लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति और आवश्यकता का एहसास होता है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान देश के लोगों को ऐसा महसूस होने लगा था कि उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रताएं उनसे छीन ली गई हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल इतिहास के एक काले अध्याय को याद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प को दोहराने का भी अवसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और राज्य सरकार उनके सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम में आपातकाल के दौरान प्रेस पर लगाई गई सेंसरशिप, नागरिक अधिकारों के हनन और तत्कालीन परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार लोकतंत्र सेनानियों, जिन्हें राज्य में ‘लोकतंत्र रक्षक’ के नाम से भी जाना जाता है, के सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार द्वारा लोकतंत्र सेनानियों का मासिक मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। इसके साथ ही किसी लोकतंत्र सेनानी के निधन की स्थिति में उनके आश्रितों को भी सम्मान पेंशन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। देहरादून में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोकतंत्र सेनानियों के परिवार, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नरेश बंसल, गणेश जोशी, खजान दास और सविता कपूर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने का आह्वान किया और कहा कि देश की लोकतांत्रिक विरासत को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। Post Views: 2 Post navigation रुद्रपुर के क्रिम्सन वर्ल्ड स्कूल विवाद का हुआ समाधान, सत्र पूरा होने तक सामान्य रूप से चलेगा स्कूल कर्णप्रयाग विवाद: जत्थेदार बाबा अजीत सिंह की अपील, बोले- श्रद्धालु केवल तीर्थयात्रा पर दें ध्यान