Spread the loveभवाली/ नैनीताल। दैनिक प्रभातवाणी । भवाली व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश पांडे को नाबालिग छात्रा से जुड़े गंभीर आपराधिक मामले में न्यायालय ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। पुलिस ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं और POCSO Act के तहत दर्ज मुकदमे में गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था। दो महीने पहले दर्ज हुई थी शिकायत पुलिस के अनुसार, करीब दो महीने पहले कुमाऊँ विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने मल्लीताल थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोपी पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने, धमकी देने तथा जबरन गर्भपात कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। शुरुआत में पुलिस ने मामला BNS की धारा 69 के तहत दर्ज किया था, लेकिन विवेचना के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और पीड़िता के बयानों के आधार पर मामले में दुष्कर्म, गर्भपात से संबंधित प्रावधानों तथा POCSO अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान कुछ अन्य महिलाओं ने भी महत्वपूर्ण जानकारी और साक्ष्य उपलब्ध कराए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। अग्रिम जमानत नहीं मिली गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने निचली अदालत और बाद में उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। पुलिस के अनुसार, याचिका खारिज होने के बाद नैनीताल, भवाली और हल्द्वानी पुलिस की संयुक्त टीम ने आरोपी के आवास पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान फिनाइल पीने का आरोप पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी की कार्रवाई के दौरान आरोपी ने सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण शुरू किया और स्वयं को साजिश का शिकार बताया। इसी दौरान उसने कथित रूप से फिनाइल/अन्य संदिग्ध तरल पदार्थ पी लिया। तबीयत बिगड़ने पर उसे पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय भेजा गया, जहां उपचार के बाद पुलिस अभिरक्षा में रखा गया। कोर्ट ने भेजा जेल स्वास्थ्य स्थिति सामान्य होने के बाद पुलिस आरोपी को न्यायालय में पेश कर लाई। सुनवाई के बाद अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। पुलिस ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ब्लैकमेलिंग नेटवर्क की भी जांच पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जांच केवल यौन अपराध के आरोपों तक सीमित नहीं है। डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस मामले में किसी संगठित ब्लैकमेलिंग या अन्य आपराधिक नेटवर्क की भूमिका रही है। फिलहाल इस संबंध में जांच जारी है और पुलिस ने किसी निष्कर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। नोट: यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। आरोपी के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध होने तक उन्हें कानून की दृष्टि में दोषी नहीं माना जाता। Post Views: 3 Post navigation BRO में फर्जी मजदूर घोटाले पर CBI का देशभर में बड़ा एक्शन, उत्तराखंड समेत 11 राज्यों के 26 ठिकानों पर छापेमारी