BRO में फर्जी मजदूर घोटाले पर CBI का देशभर में बड़ा एक्शन, उत्तराखंड समेत 11 राज्यों के 26 ठिकानों पर छापेमारी
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नई दिल्ली/देहरादून।

सीमा सड़क संगठन (BRO) में फर्जी दिहाड़ी मजदूरों के नाम पर सरकारी धन के कथित गबन के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को देशभर में व्यापक कार्रवाई करते हुए उत्तराखंड सहित 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी ने कुल 26 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया, जहां से बड़ी मात्रा में दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। इस कार्रवाई को हाल के वर्षों में BRO से जुड़े सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा रहा है।

CBI की प्रारंभिक जांच के अनुसार यह मामला लद्दाख में संचालित BRO की महत्वपूर्ण परियोजनाओं **प्रोजेक्ट विजयक** और **प्रोजेक्ट योजक** से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों ने सरकारी अभिलेखों में ऐसे मजदूरों के नाम दर्ज किए जो वास्तविक रूप से मौजूद ही नहीं थे। इन कथित फर्जी श्रमिकों के नाम पर वेतन, भत्ते और अन्य भुगतान जारी किए गए, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा।

जांच एजेंसी की कार्रवाई उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड तक फैली रही। विभिन्न स्थानों पर एक साथ की गई तलाशी के दौरान अधिकारियों ने कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक संबंधी दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं। इन सामग्रियों की फॉरेंसिक जांच कर वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं की गहराई से पड़ताल की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार इस मामले की शुरुआत BRO के तकनीकी बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स द्वारा की गई आंतरिक जांच से हुई थी। जांच में वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद रक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आपराधिक शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर CBI ने चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं।

एफआईआर में सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल, मेजर और इंजीनियर रैंक के कई अधिकारियों सहित कुल 10 वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनके अलावा कुछ निजी ठेकेदारों और अन्य व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। सभी आरोप फिलहाल जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया तथा विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

आरोपियों के विरुद्ध सरकारी धन के गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित फर्जी भुगतान की राशि किन खातों में गई और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

CBI अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों से पूछताछ भी की जाएगी। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य लोगों को भी शामिल किया जा सकता है।

हालांकि CBI ने अभी तक उत्तराखंड में छापेमारी किए गए किसी विशेष स्थान या किसी अधिकारी की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। जांच जारी होने के कारण एजेंसी फिलहाल साक्ष्यों के विश्लेषण और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता और सरकारी धन के उपयोग को लेकर लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और जब्त किए गए साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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