Spread the loveदैनिक प्रभातवाणी | देहरादून उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साइबर अपराधियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी को 30 लाख रुपये की चपत लगा दी। यह मामला न केवल साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग किस तरह आम लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक रिटायर्ड अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक वीडियो देखा, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरह दिखने वाली छवि निवेश और शेयर ट्रेडिंग से भारी मुनाफा कमाने का दावा कर रही थी। बाद में जांच में सामने आया कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया डीपफेक वीडियो था। वीडियो पर भरोसा कर पीड़ित ने उसमें दिए गए लिंक के माध्यम से एक कथित निवेश वेबसाइट पर अपना पंजीकरण कराया। इसके बाद विदेशी नंबरों से लगातार फोन कॉल आने लगे। कॉल करने वालों ने खुद को निवेश सलाहकार बताते हुए पीड़ित को शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के जरिए कम समय में अधिक लाभ कमाने का भरोसा दिलाया। शुरुआत में ठगों ने पीड़ित से लगभग 200 डॉलर जमा कराए और वेबसाइट के डैशबोर्ड पर फर्जी मुनाफा दिखाकर उनका विश्वास जीत लिया। कुछ दिनों बाद उन्हें अधिक कमाई का लालच देकर गोल्ड अकाउंट लेने के लिए प्रेरित किया गया। मुनाफे के झांसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग किश्तों में करीब 30 लाख रुपये निवेश कर दिए। जब पीड़ित ने अपने निवेश की गई राशि और मुनाफे को निकालने की कोशिश की तो वेबसाइट पर उनका अकाउंट फ्रीज कर दिया गया। इसके बाद कथित सलाहकारों ने अकाउंट को अनफ्रीज करने के नाम पर और पैसे जमा कराने की मांग शुरू कर दी। लगातार पैसे मांगने पर पीड़ित को ठगी का संदेह हुआ और उन्होंने साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क किया। मामले की शिकायत मिलने के बाद देहरादून साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैंक खातों, वेबसाइट और विदेशी नंबरों की तकनीकी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अब लोगों को फंसाने के लिए एआई और डीपफेक जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे ऐसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी सोशल मीडिया विज्ञापन, निवेश योजना या ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर भरोसा करने से पहले उसकी वैधता की जांच करना बेहद जरूरी है। यदि किसी वीडियो में कोई बड़ा नेता, अभिनेता या प्रसिद्ध व्यक्ति असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का दावा करता दिखाई दे तो उसकी सत्यता की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान वेबसाइट या ऐप पर पैसा निवेश न करें और केवल सेबी (SEBI) अथवा अन्य अधिकृत नियामक संस्थाओं से पंजीकृत प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें। साथ ही विदेशी नंबरों से आने वाले निवेश संबंधी कॉल और संदेशों से सतर्क रहें। अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करनी चाहिए। समय रहते शिकायत दर्ज होने पर ठगी गई रकम को ट्रैक कर रोकने की संभावना बढ़ जाती है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है और थोड़ी सी सावधानी लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है। Post Views: 3 Post navigation चारधाम यात्रा मार्ग पर स्मैक तस्कर गिरफ्तार, उत्तरकाशी पुलिस ने 9.34 ग्राम अवैध स्मैक की बरामद टिहरी पुलिस ने बचाई जान, जांच में निकले बाइक चोर; 24 घंटे में दोनों आरोपी गिरफ्तार