Spread the love Navratri 2025: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, हरियाली जमाने की विधि और विशेष तथ्य दैनिक प्रभातवाणी, 21 सितंबर 2025। भारत में नवरात्रि का पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सांस्कृतिक, पारिवारिक और सामाजिक मेलजोल का प्रतीक भी है। नवरात्रि का पर्व नकारात्मक शक्तियों पर विजय, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है। इस वर्ष नवरात्रि 8 अक्टूबर 2025 से 16 अक्टूबर 2025 तक मनाई जाएगी। इस अवधि में माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और पूरे देश में भव्य आयोजन होते हैं। नवरात्रि के दौरान भक्तजन व्रत रखते हैं, देवी के नौ रूपों का पूजन करते हैं और गरबा-डांडिया जैसे सांस्कृतिक उत्सव में भाग लेते हैं। इसके साथ ही, हरियाली जमाने की परंपरा भी निभाई जाती है, जो पारंपरिक रूप से महिलाओं और बच्चों में उत्साह का प्रतीक है। नवरात्रि का धार्मिक महत्व नवरात्रि शब्द का अर्थ है ‘नौ रातें’। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। प्रत्येक दिन माता के अलग रूप की पूजा के माध्यम से मानसिक शांति, आत्मशुद्धि और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि का समय बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। नवरात्रि का पर्व खासतौर पर माता दुर्गा की शक्ति और उनके नौ रूपों की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। इन रूपों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। प्रत्येक रूप का अपना विशेष महत्व और आध्यात्मिक लाभ होता है। 2025 के नवरात्रि का पंचांग और शुभ मुहूर्त शारदीय नवरात्रि आरंभ: 8 अक्टूबर 2025 शारदीय नवरात्रि समापन: 16 अक्टूबर 2025 सरस्वती पूजा: 14 अक्टूबर 2025 विजया दशमी (दशहरा): 17 अक्टूबर 2025 नौ दिन की देवी पूजन मुहूर्त: शैलपुत्री माता – 5:30–8:00 बजे ब्रह्मचारिणी माता – 5:40–8:10 बजे चंद्रघंटा माता – 5:50–8:20 बजे कूष्मांडा माता – 6:00–8:30 बजे स्कंदमाता – 6:10–8:40 बजे कात्यायनी माता – 6:20–8:50 बजे कालरात्रि माता – 6:30–9:00 बजे महागौरी माता – 6:40–9:10 बजे सिद्धिदात्री माता – 6:50–9:20 बजे नवरात्रि व्रत और पूजा विधि नवरात्रि में व्रत रखने वाले भक्तजन शाकाहारी भोजन करते हैं। व्रत में शराब, मांसाहारी भोजन और अनावश्यक तामसिक चीज़ों से परहेज किया जाता है। प्रतिदिन माता के एक रूप की पूजा, मंत्र जाप और भजन करना शुभ माना जाता है। व्रत का उद्देश्य केवल आहार में संयम नहीं है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक अनुशासन भी है। नवरात्रि के दौरान नियमित रूप से ध्यान और योग करना मनोवैज्ञानिक शांति प्रदान करता है और भक्त की आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाता है। हरियाली जमाने की परंपरा हरियाली जमाना नवरात्रि का एक अनोखा उत्सव है। यह विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों में लोकप्रिय है। इस परंपरा में घर और पूजा स्थल को हरे पौधों, अंकुरित अनाज और फूलों से सजाया जाता है। इसे पर्यावरणीय जागरूकता और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। हरियाली जमाने का शुभ समय दिन: 9 अक्टूबर 2025 (नवरात्रि का दूसरा दिन) समय: प्रात: 6:00–8:00 बजे हरियाली जमाने की सामग्री हरे पत्ते – नीम, तुलसी, हरा धनिया या अन्य हरे पौधे अंकुरित अनाज – गेहूं, चना, मूली या जौ लाल और पीले कपड़े मिट्टी वाले छोटे बर्तन हल्दी और सिंदूर फूल – गुलाब, चमेली या मौसमी फूल पानी और सिंचाई का बर्तन हरियाली जमाने की पूरी विधि साफ-सफाई: पूजा स्थल या आंगन को अच्छे से साफ करें। पौधे लगाना: मिट्टी वाले बर्तन में अंकुरित अनाज डालें और हल्का पानी डालकर लाल या पीले कपड़े में सजाएँ। हरे पत्तों से सजावट: नीम, तुलसी या अन्य हरे पत्तों को बर्तन और पूजा स्थल के चारों ओर सजाएँ। फूल और रंग: फूलों और हल्दी-सिंदूर का इस्तेमाल कर हरियाली को और सुंदर बनाएं। पूजा मंत्र: शुभ समय में माता दुर्गा के मंत्र का जाप करें और हरियाली पर जल अर्पित करें। जल देना: पूरे नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन हल्का पानी डालकर अंकुरित अनाज और पौधों की देखभाल करें। भजन और कथा: हरियाली सजाते समय देवी के भजन गाएं या कथा सुनें। साझा उत्सव: महिलाएं और बच्चे मिलकर यह हरियाली सजाते हैं और समाज में इसे साझा करते हैं। सांस्कृतिक उत्सव और गरबा हरियाली जमाने के दौरान देशभर में गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित होते हैं। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा पहनकर रातभर भजन और कीर्तन करती हैं। इस समय गाँव और शहरों में मेलों का आयोजन भी होता है, जिससे सामाजिक समरसता और उत्साह बढ़ता है। विशेष तथ्य नौ देवी रूपों का महत्व: शैलपुत्री – स्थिरता और शक्ति ब्रह्मचारिणी – संयम और ज्ञान चंद्रघंटा – वीरता और साहस कूष्मांडा – सृजन और ऊर्जा स्कंदमाता – मातृत्व और करुणा कात्यायनी – धर्म और शक्ति कालरात्रि – बुरी शक्तियों का नाश महागौरी – शांति और शुद्धता सिद्धिदात्री – सिद्धि और सफलता हरियाली जमाने का वैज्ञानिक महत्व: अंकुरित अनाज में जीवन शक्ति और पोषण अधिक होता है। हरे पौधों के आसपास रहने से मानसिक शांति मिलती है। पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ती है। सांस्कृतिक तथ्य: गुजरात और महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया प्रमुख आकर्षण हैं। हरियाली जमाना ग्रामीण क्षेत्रों में फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मंदिरों में नौ दिन तक भव्य आयोजन होते हैं। आध्यात्मिक लाभ: व्रत और पूजा से ध्यान और मानसिक शक्ति बढ़ती है। भजन और मंत्र जाप से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। सामाजिक पहलू: नवरात्रि और हरियाली जमाने के दौरान परिवार और समाज में मेलजोल बढ़ता है। महिलाएं और बच्चे सामूहिक रूप से हरियाली सजाकर सामाजिक सहभागिता बढ़ाते हैं। स्वास्थ्य और सजगता व्रत और हरियाली जमाने के दौरान संतुलित आहार और पर्याप्त जल का सेवन जरूरी है। लंबे समय तक उपवास रखने वाले लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पोषण मिले। योग और ध्यान मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। समापन इस बार का नवरात्रि 2025 माता दुर्गा की पूजा, व्रत पालन, हरियाली जमाने और सांस्कृतिक उत्सव का संगम है। यह पर्व जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर आता है। हरियाली जमाने की पूरी विधि अपनाकर भक्तजन अपने घर और समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैला सकते हैं। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर दैनिक प्रभातवाणी की टीम की शुभकामनाएँ – यह पर्व आपके जीवन में उजाला, स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आए। Post Views: 39 Post navigation उत्तराखंड बाजार नवीनीकरण योजना: पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल UKSSSC पटवारी–लेखपाल भर्ती परीक्षा से पहले पेपर लीक, चार गिरफ्तार; महिला प्रोफेसर भी शामिल