UKSSSC पटवारी–लेखपाल भर्ती परीक्षा से पहले पेपर लीक, चार गिरफ्तार; महिला प्रोफेसर भी शामिल

दैनिक प्रभातवाणी
देहरादून, 22 सितम्बर 2025
UKSSSC पटवारी–लेखपाल भर्ती परीक्षा से पहले पेपर लीक, चार गिरफ्तार; महिला प्रोफेसर भी शामिल
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की बहुप्रतीक्षित पटवारी–लेखपाल भर्ती परीक्षा एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। जिस परीक्षा का इंतजार प्रदेश के हजारों युवाओं ने महीनों तक किया, वह अब पेपर लीक के आरोपों के कारण कठघरे में खड़ी है। ताज़ा जानकारी के मुताबिक परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नपत्र लीक होने का खुलासा हुआ है और इस घोटाले में मोटी रकम वसूली गई। शुरुआती जांच में STF को ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि पेपर 12 से 15 लाख रुपये तक में बेचा गया। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद पूरे राज्य में हलचल मच गई है।
पेपर लीक की भनक और पुलिस की त्वरित कार्रवाई
जानकारी के अनुसार STF को कुछ दिनों पहले इस बात की गुप्त सूचना मिली थी कि पटवारी–लेखपाल परीक्षा का पेपर बाहर के लोगों तक पहुंच गया है। पेपर बेचने के लिए लाखों रुपये की डील होने की खबर थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने परीक्षा से पहले ही सतर्कता बढ़ा दी और संदिग्धों की निगरानी शुरू कर दी। मोबाइल सर्विलांस, साइबर ट्रैकिंग और खुफिया नेटवर्क की मदद से पुलिस ने सबूत इकट्ठा किए। STF की कार्रवाई इतनी तेज़ थी कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही आरोपियों तक पहुंच बना ली गई।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें सबसे बड़ा नाम एक महिला प्रोफेसर का है, जो कथित रूप से इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी मानी जा रही है। यह महिला प्रोफेसर एक निजी कोचिंग संस्थान से जुड़ी बताई जा रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने अपने प्रभाव और संपर्कों का उपयोग कर प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाई और अभ्यर्थियों को मोटी रकम लेकर पेपर उपलब्ध कराया। इसके अलावा एक कोचिंग संचालक और दो बिचौलिए भी गिरफ्तार हुए हैं, जिनकी भूमिका पेपर बेचने और सौदे कराने में अहम रही।
12–15 लाख में हुआ पेपर का सौदा
पुलिस सूत्रों के अनुसार पटवारी–लेखपाल परीक्षा का पेपर लाखों रुपये में बेचा गया। STF को पता चला है कि कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा से पहले ही पेपर हासिल करने के लिए 12 से 15 लाख रुपये तक की राशि चुकाई। यह रकम अभ्यर्थियों तक पहुंचाने के लिए कोचिंग संचालक और बिचौलियों ने एक संगठित नेटवर्क तैयार किया था। पेपर मिलने के बाद कुछ अभ्यर्थियों को गुप्त स्थानों पर बुलाकर तैयारी करवाई गई। STF ने इस पूरी प्रक्रिया के डिजिटल और भौतिक सबूत जुटा लिए हैं, जिनमें कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और मोबाइल चैट शामिल हैं।
आयोग की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना ने UKSSSC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोग ने इस परीक्षा के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का दावा किया था। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल जैमर, CCTV कैमरे और दोहरी सीलिंग जैसी व्यवस्थाएं की गई थीं। इसके बावजूद पेपर लीक होना आयोग की निगरानी व्यवस्था की कमियों को उजागर करता है। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर लीक की अभी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पूरी होने तक कोई भी संभावना खारिज नहीं की जा सकती। आयोग ने STF को मामले की गहराई से जांच का जिम्मा सौंप दिया है और कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
अभ्यर्थियों का गुस्सा और आंदोलन की चेतावनी
राज्य के विभिन्न जिलों से भर्ती परीक्षा में शामिल होने आए हजारों युवाओं में भारी नाराजगी है। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और पौड़ी जैसे शहरों में अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बार–बार होने वाले पेपर लीक ने उनकी मेहनत और भविष्य दोनों को खतरे में डाल दिया है। कई परीक्षार्थियों ने भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर नई परीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं दी जाएगी तब तक इस तरह की घटनाएं रुक नहीं सकतीं। सोशल मीडिया पर भी छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है, जहां हजारों यूजर्स सरकार और आयोग की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।
STF की जांच और आगे की कार्रवाई
STF ने गिरफ्तार चारों आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। पूछताछ में कई नए नाम सामने आने की संभावना है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए अन्य राज्यों में भी दबिश देने की तैयारी कर रही है। मोबाइल और बैंक खातों की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पेपर किन-किन लोगों तक पहुंचा और सौदे में कितनी रकम वसूली गई। STF सूत्रों के अनुसार इस गिरोह के तार राज्य के बाहर तक जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस ने आरोपियों पर आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (साजिश) और परीक्षा अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। अगर जांच में आयोग के किसी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उन पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जाए और पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए।
भर्ती प्रक्रिया और युवाओं का भविष्य
यह मामला केवल परीक्षा की पारदर्शिता को ही नहीं बल्कि राज्य के युवाओं के भविष्य को भी प्रभावित कर रहा है। पटवारी–लेखपाल परीक्षा में इस बार कुल 416 पदों के लिए भर्ती की प्रक्रिया चल रही थी। हजारों युवाओं ने महीनों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा दी। पेपर लीक की घटना ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। इससे पहले भी UKSSSC की कई परीक्षाओं में लीक और धांधली के मामले सामने आ चुके हैं। बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं से अभ्यर्थियों का आयोग और सरकार पर विश्वास डगमगाने लगा है।
सरकार पर दबाव, कड़े कदम की मांग
पेपर लीक के खुलासे के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने में असफल रही है। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराई जाए और सभी दोषियों को कठोर सजा दी जाए। सरकार पर दबाव बढ़ता देख मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
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UKSSSC पटवारी–लेखपाल भर्ती परीक्षा का यह पेपर लीक कांड एक बार फिर साबित करता है कि राज्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सुधार की जरूरत है। जब तक दोषियों को कड़ी सजा और सुरक्षा व्यवस्था में ठोस बदलाव नहीं किए जाएंगे, तब तक अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करना मुश्किल होगा। युवा पीढ़ी का भविष्य इस परीक्षा पर टिका है, इसलिए सरकार और जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती न केवल दोषियों को पकड़ना है बल्कि आने वाली परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष बनाना भी है।
यह घटना केवल कानून व्यवस्था की विफलता नहीं बल्कि उन हजारों युवाओं की मेहनत पर सीधा प्रहार है जो ईमानदारी से अपनी तैयारी कर रहे थे। अब सबकी निगाहें STF की जांच और सरकार की आगामी कार्रवाइयों पर टिकी हैं, ताकि यह साफ हो सके कि उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं की गरिमा और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए कितने सख्त कदम उठाए जाते हैं।