January 11, 2026

धराली फ्लैश बाढ़ पर ‘Nature’s bulldozer’ पोस्ट विवाद — 5 पर FIR, सोशल मीडिया पर संवेदनहीन टिप्पणी का मामला

धराली फ्लैश बाढ़ पर ‘Nature’s bulldozer’ पोस्ट विवाद — 5 पर FIR, सोशल मीडिया पर संवेदनहीन टिप्पणी का मामला
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धराली फ्लैश बाढ़ पर ‘Nature’s bulldozer’ पोस्ट विवाद — 5 पर FIR, सोशल मीडिया पर संवेदनहीन टिप्पणी का मामला

धराली (उत्तरकाशी) में आई विनाशकारी फ्लैश बाढ़, जिसने सैकड़ों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया, अब सोशल मीडिया विवाद का रूप भी ले चुकी है। देहरादून पुलिस ने ‘Nature’s bulldozer’ जैसे अभद्र और आपदा-पीड़ितों की भावनाओं को आहत करने वाले कैप्शन के साथ पोस्ट करने पर 5 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें से चार की पहचान हो चुकी है, जबकि एक अज्ञात आरोपी की तलाश जारी है।

पोस्ट से भड़की संवेदनशीलता पर बहस

आपदा में जहां राहत और बचाव कार्य तेज़ी से चल रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया पर डाले गए इस पोस्ट ने पीड़ित परिवारों और स्थानीय समुदाय में रोष पैदा कर दिया। पोस्ट में धराली के बाढ़ प्रभावित इलाकों की तस्वीर के साथ ‘Nature’s bulldozer’ लिखा गया था, जिसे कई लोगों ने आपदा का मज़ाक उड़ाना और पीड़ितों के दर्द को कमतर आंकना बताया।

पुलिस की कार्रवाई

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने बताया कि यह पोस्ट आपदा संवेदनशीलता से जुड़ी धाराओं और भ्रामक/उत्तेजक संदेश फैलाने के आरोप में दर्ज की गई है। पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

SSP के अनुसार —

“ऐसे समय में जब पूरा प्रशासन और बचाव दल लोगों की जान बचाने में जुटे हैं, इस तरह की पोस्ट समाज में गलत संदेश देती है और पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।”

चार की पहचान, एक की तलाश

पुलिस जांच में सामने आया कि इन पांच में से चार आरोपी अलग-अलग सोशल मीडिया ग्रुपों के सक्रिय सदस्य हैं, जो पहले भी विवादित पोस्ट करने के लिए चर्चित रहे हैं।

  • पहचाने गए चार आरोपी: स्थानीय स्तर पर सक्रिय सोशल मीडिया यूज़र्स, जिनके नाम पुलिस ने औपचारिक रूप से अभी सार्वजनिक नहीं किए हैं।

  • पांचवां आरोपी: एक फर्जी प्रोफाइल से पोस्ट करने वाला, जिसकी IP लोकेशन ट्रेस की जा रही है।

जनता और प्रशासन की अपील

स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने जनता से अपील की है कि आपदा के समय अफवाहें, भ्रामक तस्वीरें या संवेदनहीन कैप्शन सोशल मीडिया पर न डालें। इसके बजाय प्रशासनिक सूचना और राहत अभियानों से जुड़ी प्रमाणित खबरें ही साझा करें।

कानूनी नजीर और सोशल मीडिया जिम्मेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला एक कानूनी नजीर बनेगा, जिससे भविष्य में आपदा के दौरान सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना सामग्री डालने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी।
साइबर कानून विशेषज्ञों के अनुसार —

“आपदा प्रभावित क्षेत्रों में गलत या संवेदनहीन सामग्री पोस्ट करना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनी रूप से भी दंडनीय अपराध है।”

दैनिक प्रभातवाणी  — संवेदनशीलता ही मानवीयता

धराली जैसी आपदाओं में राहत कार्य, बचाव मिशन और मानवीय सहयोग की सबसे ज़्यादा आवश्यकता होती है। ऐसे में संवेदनशील और सकारात्मक संवाद ही समाज को मजबूती दे सकते हैं। FIR दर्ज होने के बाद पुलिस की सख्ती एक स्पष्ट संदेश देती है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ ज़िम्मेदारी भी अनिवार्य है।