उत्तराखंड को 12 महीने का आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी, चारधाम से मानसखंड तक विकास को मिलेगी नई गति
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देहरादून, दैनिक प्रभातवाणी। उत्तराखंड सरकार राज्य को केवल चारधाम यात्रा के छह माह के पारंपरिक सीजन तक सीमित रखने के बजाय वर्षभर संचालित होने वाले आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत चारधाम यात्रा, शीतकालीन धार्मिक पर्यटन, मानसखंड मंदिरमाला मिशन और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं को एक साथ जोड़कर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि यदि पर्यटन गतिविधियां पूरे वर्ष जारी रहती हैं तो स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार मिलेगा और पलायन की समस्या को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

राज्य सरकार की रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा चारधाम यात्रा को बारह महीने की धार्मिक यात्रा के रूप में विकसित करना है। वर्तमान में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट सर्दियों में बंद हो जाते हैं, लेकिन अब शीतकालीन गद्दी स्थलों को भी पर्यटन और आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। केदारनाथ धाम की शीतकालीन गद्दी ओंकारेश्वर मंदिर तथा बद्रीनाथ धाम की शीतकालीन पूजा नृसिंह मंदिर में संपन्न होती है। सरकार इन स्थलों पर सुविधाओं का विस्तार कर श्रद्धालुओं को सर्दियों के दौरान भी धार्मिक यात्रा के लिए आकर्षित करने की योजना पर काम कर रही है।

इसके साथ ही केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत व्यापक पुनर्विकास कार्य किए जा रहे हैं। यात्रा मार्गों को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जा रहा है। तीर्थयात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रतीक्षालय, आवासीय व्यवस्थाएं, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और आपदा प्रबंधन तंत्र विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना और उत्तराखंड को वैश्विक धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर और अधिक सशक्त बनाना है।

सरकार का विशेष ध्यान कुमाऊं क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर भी केंद्रित है। मानसखंड मंदिरमाला मिशन के माध्यम से कुमाऊं के ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिरों को एक व्यवस्थित धार्मिक पर्यटन सर्किट से जोड़ा जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत जागेश्वर धाम, आदि कैलाश और पाताल भुवनेश्वर जैसे प्रमुख स्थलों को विकसित किया जा रहा है। सड़क संपर्क, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता और पर्यटक सुविधाओं में सुधार के माध्यम से कुमाऊं क्षेत्र को भी धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाने की योजना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए दूरगामी परिणाम लेकर आ सकती है। वर्तमान में बड़ी संख्या में स्थानीय व्यवसाय चारधाम यात्रा सीजन पर निर्भर रहते हैं। होटल संचालक, टैक्सी चालक, घोड़ा-खच्चर संचालक, गाइड, दुकानदार और हस्तशिल्प व्यवसायी सीमित अवधि में ही आय अर्जित कर पाते हैं। यदि धार्मिक और पर्यटन गतिविधियां पूरे वर्ष संचालित होती हैं तो इन वर्गों को बारह महीने रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध होंगे।

पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड में प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम मौजूद है। सरकार इसी क्षमता का उपयोग करते हुए राज्य को वर्षभर पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना चाहती है। इसके लिए धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, योग और वेलनेस पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

राज्य सरकार की यह व्यापक रणनीति केवल पर्यटन विकास तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने, स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और पलायन को रोकने का भी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यदि योजनाएं निर्धारित समय के अनुसार सफलतापूर्वक लागू होती हैं तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के सबसे महत्वपूर्ण बारहमासी आध्यात्मिक और पर्यटन राज्यों में अपनी पहचान और अधिक मजबूत कर सकता है।

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