Spread the loveदेहरादून, दैनिक प्रभातवाणी। उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। चीन और नेपाल सीमा से लगे दूरस्थ गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकना और वहां के निवासियों को उनके घरों के निकट ही बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराना है। राज्य के सीमावर्ती गांवों में संचालित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सड़क, पेयजल, बिजली, संचार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। वर्षों से विकास की राह देख रहे इन गांवों में अब आधुनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ने लगी है। सरकार का मानना है कि सीमांत क्षेत्रों को मजबूत बनाना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आबादी वाले और विकसित गांव सीमाओं की सुरक्षा में अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए होमस्टे योजना को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। ग्रामीण परिवारों को अपने घरों को पर्यटकों के लिए होमस्टे के रूप में विकसित करने हेतु प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ रही है और पर्यटकों को भी उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार सीमांत क्षेत्रों में कई नवाचार आधारित पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किए गए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से आधुनिक तकनीक, डिजिटल सेवाओं और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग की संभावनाओं को परखा जा रहा है। यदि ये परियोजनाएं सफल होती हैं तो इन्हें अन्य दुर्गम क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। दूरस्थ गांवों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे मरीज विशेषज्ञ चिकित्सकों से ऑनलाइन परामर्श प्राप्त कर सकें। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक उपकरणों और आवश्यक संसाधनों से सुसज्जित किया जा रहा है। आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए एम्बुलेंस नेटवर्क का भी विस्तार किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को शीघ्र उपचार मिल सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों से ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा उन्हें इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर कम जाना पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विकास, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी ये योजनाएं प्रभावी रूप से लागू होती रहीं तो सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर तेजी से सुधरेगा। साथ ही, पलायन की समस्या पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। सरकार का लक्ष्य सीमांत गांवों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत करना है, जिससे उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की नई तस्वीर उभर सके। Post Views: 3 Post navigation पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल: नैनीताल हाईकोर्ट में ‘नो व्हीकल डे’, मुख्य न्यायाधीश समेत सभी पैदल पहुंचे न्यायालय उत्तराखंड को 12 महीने का आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी, चारधाम से मानसखंड तक विकास को मिलेगी नई गति