Spread the love देहरादून | 25 अप्रैल 2026 | दैनिक प्रभातवाणी उत्तराखंड में प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया की शुरुआत हो चुकी है, जो आने वाले वर्षों में राज्य की विकास योजनाओं की दिशा तय करेगी। वर्ष 2027 में प्रस्तावित राष्ट्रीय जनगणना को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इसकी प्रारंभिक तैयारियों का आगाज़ कर दिया है। इसी क्रम में 25 अप्रैल से “हर द्वार दस्तक” अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारी और गणना कर्मी घर-घर जाकर डिजिटल माध्यम से जानकारी एकत्र कर रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक परिवार तक पहुंचकर सटीक और अद्यतन आंकड़े जुटाना है, ताकि भविष्य की नीतियां अधिक प्रभावी और जमीनी हकीकत पर आधारित बन सकें। यह पहली बार है जब उत्तराखंड में इतनी व्यापक स्तर पर जनगणना की प्रक्रिया को डिजिटल स्वरूप दिया जा रहा है। गणना कर्मियों को टैबलेट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से डेटा दर्ज करने की सुविधा दी गई है, जिससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि आंकड़ों की सटीकता भी बढ़ेगी। प्रशासन का मानना है कि इस डिजिटल पहल से डेटा संग्रहण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी, साथ ही भविष्य में किसी भी प्रकार के विश्लेषण और योजना निर्माण में आसानी होगी। इस अभियान के तहत प्रत्येक घर से लगभग 33 प्रकार की जानकारी जुटाई जा रही है। इसमें मकान की स्थिति, निर्माण का प्रकार, स्वामित्व की स्थिति, पेयजल की उपलब्धता, शौचालय की व्यवस्था, बिजली कनेक्शन, रसोई गैस की सुविधा, इंटरनेट और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी मूलभूत सुविधाओं का विवरण शामिल है। इसके अलावा परिवार के सदस्यों की संख्या, उनकी आयु, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक स्थिति से जुड़ी जानकारियां भी दर्ज की जा रही हैं। यह डेटा न केवल जनसंख्या का आंकलन करने में मदद करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि राज्य के किन क्षेत्रों में विकास की अधिक आवश्यकता है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना के आंकड़े ही भविष्य की सरकारी योजनाओं का आधार बनते हैं, इसलिए इसमें दी गई जानकारी का सटीक होना बेहद जरूरी है। यदि किसी भी स्तर पर गलत या अधूरी जानकारी दी जाती है, तो उसका सीधा असर विकास योजनाओं और सरकारी सुविधाओं के वितरण पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की जनगणना उत्तराखंड के लिए कई मायनों में अहम साबित होगी। तेजी से बदलती जीवनशैली, शहरीकरण, पलायन और डिजिटल पहुंच जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा यह डेटा राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे की नई तस्वीर पेश करेगा। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में संसाधनों का अधिक आवंटन जरूरी है और किन योजनाओं में सुधार की आवश्यकता है। कुल मिलाकर, “हर द्वार दस्तक” अभियान केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के भविष्य की नींव रखने का एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में यही आंकड़े राज्य की नीतियों, योजनाओं और विकास की गति को निर्धारित करेंगे, जिससे आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा सकेंगे। Post Views: 26 Post navigation बद्रीनाथ धाम के विकास में बड़ा योगदान, उद्योगपति महेंद्र शर्मा ने दी 1.01 करोड़ की सहायता उत्तराखंड में मौसम ने बदली करवट, भीषण गर्मी के बीच बारिश और तेज हवाओं का येलो अलर्ट