Spread the loveदेहरादून, 28 जून।उत्तराखंड में बेरोजगार युवाओं को ट्रेनिंग और नौकरी का झांसा देकर ठगने का एक बड़ा मामला सामने आया है। राज्य के विभिन्न जिलों में लगभग 1,300 युवाओं से कथित तौर पर लाखों रुपये की ठगी की गई है। पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि एक निजी संस्था ने सरकारी व निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने और ट्रेनिंग देने का वादा कर उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, ट्रेनिंग शुल्क और दस्तावेज जमा करवाए, लेकिन न तो ट्रेनिंग दी गई और न ही कोई नौकरी मिली।कैसे हुआ खुलासा?कुछ महीनों तक कोई जवाब न मिलने पर युवाओं ने जब संस्था के दफ्तरों में संपर्क किया, तो वे बंद मिले। इसके बाद कई जिलों से दर्जनों युवाओं ने श्रम विभाग और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। कुछ पीड़ितों ने आरटीआई और सोशल मीडिया के ज़रिए जानकारी जुटाकर इसका खुलासा किया।किन जिलों में फैला मामला?देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा और पौड़ी जैसे जिलों में इस फर्जीवाड़े के शिकार हुए युवाओं ने दावा किया है कि संस्था ने अपने स्थानीय एजेंटों के माध्यम से प्रचार कर युवाओं को निशाना बनाया।क्या वादा किया गया था?संस्था ने प्रचार किया था कि 3 से 6 महीने की ट्रेनिंग के बाद युवाओं को सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार दिया जाएगा। इसके लिए 5,000 से लेकर 25,000 रुपये तक की फीस वसूली गई। इसके साथ ही प्रमाणपत्र और नियुक्ति पत्र भी देने की बात कही गई थी।सरकार की प्रतिक्रिया और जांच का आदेशमामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड श्रम विभाग ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय से भी इस विषय पर रिपोर्ट तलब की गई है। श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का लगता है। पुलिस की साइबर सेल को भी जांच में जोड़ा गया है ताकि डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के सुराग मिले।प्रभावित युवाओं की मांगपीड़ित युवाओं का कहना है कि उन्हें आर्थिक और मानसिक क्षति हुई है। वे चाहते हैं कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके पैसे वापस दिलवाए जाएं। साथ ही, इस तरह की संस्थाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाकर कड़ी कार्रवाई की जाए। Post Views: 63 Post navigationउत्तराखंड: सोलर टैरिफ विवाद में अपीलीय ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला, यूपीसीएल की याचिका खारिज उत्तराखंड में भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, भूस्खलन और सड़क बंदी ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता
कैसे हुआ खुलासा?कुछ महीनों तक कोई जवाब न मिलने पर युवाओं ने जब संस्था के दफ्तरों में संपर्क किया, तो वे बंद मिले। इसके बाद कई जिलों से दर्जनों युवाओं ने श्रम विभाग और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। कुछ पीड़ितों ने आरटीआई और सोशल मीडिया के ज़रिए जानकारी जुटाकर इसका खुलासा किया।किन जिलों में फैला मामला?देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा और पौड़ी जैसे जिलों में इस फर्जीवाड़े के शिकार हुए युवाओं ने दावा किया है कि संस्था ने अपने स्थानीय एजेंटों के माध्यम से प्रचार कर युवाओं को निशाना बनाया।क्या वादा किया गया था?संस्था ने प्रचार किया था कि 3 से 6 महीने की ट्रेनिंग के बाद युवाओं को सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार दिया जाएगा। इसके लिए 5,000 से लेकर 25,000 रुपये तक की फीस वसूली गई। इसके साथ ही प्रमाणपत्र और नियुक्ति पत्र भी देने की बात कही गई थी।सरकार की प्रतिक्रिया और जांच का आदेशमामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड श्रम विभाग ने उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय से भी इस विषय पर रिपोर्ट तलब की गई है। श्रम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का लगता है। पुलिस की साइबर सेल को भी जांच में जोड़ा गया है ताकि डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के सुराग मिले।प्रभावित युवाओं की मांगपीड़ित युवाओं का कहना है कि उन्हें आर्थिक और मानसिक क्षति हुई है। वे चाहते हैं कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके पैसे वापस दिलवाए जाएं। साथ ही, इस तरह की संस्थाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाकर कड़ी कार्रवाई की जाए।