Spread the loveदेहरादून। उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है और आने वाले घंटों में राज्य के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बेहद आक्रामक रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने पर्वतीय जिलों में बर्फबारी, ओलावृष्टि और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जबकि मैदानी इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। मौसम विभाग की इस चेतावनी के बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों विशेषकर चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में मौसम के अधिक खराब रहने की आशंका है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 4200 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। इसके साथ ही कई स्थानों पर गरज-चमक, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बदलते मौसम के कारण भूस्खलन और सड़क अवरोध की स्थिति बनने की आशंका बढ़ गई है। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी गढ़वाल और हरिद्वार सहित कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। तेज हवाओं के कारण बिजली आपूर्ति, संचार सेवाएं और यातायात प्रभावित होने की संभावना जताई गई है। कई स्थानों पर पेड़ गिरने और अस्थायी ढांचों को नुकसान पहुंचने का भी खतरा बना हुआ है। देहरादून, ऋषिकेश, डोईवाला, मसूरी, चकराता, पुरोला और बड़कोट जैसे क्षेत्रों में भी तेज वर्षा के दौर देखने को मिल सकते हैं। मौसम विभाग ने लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। अचानक तेज बारिश के कारण नालों और गदेरों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। चारधाम यात्रा पर भी मौसम की मार पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मार्गों पर बारिश और बर्फबारी के कारण यात्रा प्रभावित हो सकती है। पहाड़ी मार्गों पर मलबा आने, पत्थर गिरने और भूस्खलन जैसी घटनाएं यात्रियों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती हैं। प्रशासन ने यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और सड़कों की ताजा स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी है। कृषि क्षेत्र पर भी इस मौसम का असर दिखाई दे सकता है। कई जिलों में तैयार फसलें खेतों में खड़ी हैं और तेज हवाओं तथा ओलावृष्टि से उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। फल उत्पादक क्षेत्रों में सेब, नाशपाती और अन्य बागवानी फसलों पर भी मौसम की मार पड़ने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसलों को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल या अन्य सुरक्षा उपाय अपनाएं। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। विशेष रूप से पहाड़ी मार्गों पर वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें। तेज हवाओं के दौरान खुले मैदानों, बिजली के खंभों, बड़े पेड़ों और पुराने भवनों के आसपास खड़े होने से बचें। मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर रहें और जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण उत्तराखंड में यह मौसम परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इसके प्रभाव से अगले 24 से 48 घंटे तक राज्य के कई हिस्सों में बारिश, बर्फबारी और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। तापमान में भी गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी लेकिन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड बढ़ सकती है। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड में कांग्रेस की सक्रियता बढ़ी, राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे को लेकर देहरादून में होगी अहम बैठक नई टिहरी में जनता दरबार: पेयजल, पुनर्वास, मुआवजा और पेंशन से जुड़ी समस्याओं पर डीएम ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश