Spread the love देहरादून, 29 अप्रैल 2026। उत्तराखंड के जंगलों में इस साल फिर से आग की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। राज्य में 15 फरवरी से 29 अप्रैल 2026 के बीच 250 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे पर्यावरण और वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार इन घटनाओं में लगभग 189 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिसमें सबसे ज्यादा असर गढ़वाल मंडल में देखने को मिला है। वनाग्नि की इन घटनाओं ने न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि स्थानीय वन्यजीवों और पर्यावरण संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है। लगातार बढ़ती गर्मी, सूखी घास और मानवीय लापरवाही को इन आग की घटनाओं का प्रमुख कारण माना जा रहा है। वन विभाग के अधिकारी लगातार निगरानी और नियंत्रण के प्रयासों में जुटे हुए हैं, ताकि आग को फैलने से रोका जा सके। हालांकि, बीते कुछ दिनों में हुई बारिश ने राहत का काम किया है। बारिश के कारण कई इलाकों में आग स्वतः बुझ गई या उसे नियंत्रित करने में मदद मिली है। इसके साथ ही वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, फायर लाइन निर्माण और स्थानीय लोगों की भागीदारी से स्थिति को काफी हद तक काबू में किया गया है। राज्य सरकार और वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगलों में आग लगाने या लापरवाही से बचें। साथ ही किसी भी आग की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और नुकसान को कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में वनाग्नि की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में जनजागरूकता और सख्त निगरानी ही इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकते हैं। Post Views: 5 Post navigation उत्तराखंड में कुदरत का कहर और राहत: भारी बारिश और ओलावृष्टि का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी घर बैठे बनेगा ड्राइविंग लाइसेंस: उत्तराखंड में DL प्रक्रिया हुई पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस