उत्तराखंड सरकार पर CIABC का आरोप: विदेशी शराब को तरजीह, भारतीय ब्रांडों के साथ भेदभाव
Spread the love

देहरादून। उत्तराखंड की वर्तमान एक्साइज नीति को लेकर कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनिज़ (CIABC) ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। CIABC का कहना है कि राज्य की नीति भारतीय शराब निर्माताओं के लिए भेदभावपूर्ण है, जबकि विदेशी ब्रांडों को विशेष लाभ दिया जा रहा है।

CIABC ने बुधवार को जारी अपने प्रेस बयान में कहा कि मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर्स में प्रीमियम रिटेल आउटलेट्स केवल विदेशी शराब तक सीमित करने का निर्णय प्रधानमंत्री के ‘Make in India’ और ‘Atmanirbhar Bharat’ जैसे मिशनों के खिलाफ है। संगठन का मानना है कि इस नीति से आयातकों को एक प्रकार का वर्चुअल मोनोपोली मिल रहा है और भारतीय शराब उत्पादकों को उपभोक्ताओं तक पहुंच से वंचित किया जा रहा है।

CIABC के डायरेक्टर जनरल अनंत एस. अय्यर ने कहा, “लोकप्रिय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता भारतीय वाइन और स्पिरिट को केवल इसलिए मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर्स में बेचने से रोकना कि ये उत्तराखंड में उत्पादित नहीं हैं, पूरी तरह से अनुचित है। यह नीति भारतीय शराब निर्माताओं के हितों के खिलाफ है और उपभोक्ताओं के विकल्पों को सीमित करती है।”

उन्होंने आगे बताया कि लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल की सीमाएं, जैसे कि वाइन उत्पादन के लिए अंगूर मुख्य रूप से महाराष्ट्र और कर्नाटक से आते हैं, कई प्रसिद्ध भारतीय ब्रांडों को उत्तराखंड में उत्पादन करने में असमर्थ बनाती हैं। “भारत में निर्मित कई ब्रांड विश्वभर में लोकप्रिय हैं। स्थानीय निवासी और पर्यटक इन भारतीय विकल्पों से क्यों वंचित रहें? यह नीति स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की भावना के खिलाफ है।”

CIABC ने उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों ने कैंटीन स्टोर्स में विदेशी शराब की बिक्री बंद कर दी है, ताकि भारतीय शराब उत्पादों को बढ़ावा मिले। उनका कहना है कि उत्तराखंड सरकार की नीति राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता और ‘Swadeshi’ के एजेंडे के खिलाफ है।

संगठन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह नीति में सुधार कर भारतीय निर्मित उत्पादों का समर्थन करे, खासकर Indian-Made Foreign Liquor (IMFL) और भारतीय वाइन। CIABC ने कहा, “हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह भारतीय शराब निर्माताओं को समान अवसर प्रदान करे और विदेशी उत्पादों पर निर्भरता को बढ़ावा न दें।”

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नीति में सुधार नहीं किया गया तो यह देशी शराब उद्योग को आर्थिक और ब्रांड स्तर पर नुकसान पहुंचा सकती है। साथ ही, यह नीति उपभोक्ताओं के विकल्पों और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की प्रवृत्ति को भी प्रभावित कर सकती है।

उत्तराखंड सरकार ने अब तक इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। CIABC ने चेतावनी दी है कि यदि नीति में बदलाव नहीं किया गया तो संगठन अधिक गंभीर कानूनी और नीति सुझावों के साथ सरकार से पुनः संपर्क करेगा।