Spread the love चमोली। उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र जोशीमठ-मलारी में स्वदेशी तकनीक से विकसित अत्याधुनिक ड्रोन ‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण किया गया। समुद्र तल से लगभग 14 हजार फीट की ऊंचाई और माइनस तापमान जैसी बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ड्रोन की उड़ान क्षमता, नियंत्रण प्रणाली और तकनीकी प्रदर्शन को परखा गया। परीक्षण के सफल रहने के बाद इसे सामरिक और आपदा प्रबंधन दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार परीक्षण ऐसे इलाके में किया गया जहां ऑक्सीजन का स्तर सामान्य क्षेत्रों की तुलना में काफी कम रहता है और मौसम कुछ ही मिनटों में बदल जाता है। तेज बर्फीली हवाएं, अत्यधिक ठंड और ऊंचाई वाले कठिन वातावरण के बावजूद ‘वायु अस्त्र-1’ ने स्थिर उड़ान भरते हुए अपने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। परीक्षण के दौरान ड्रोन की नेविगेशन क्षमता, रियल टाइम निगरानी प्रणाली, कैमरा संचालन और नियंत्रण प्रणाली की भी जांच की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसी भी ड्रोन का सफल संचालन तकनीकी रूप से बड़ी चुनौती माना जाता है। कम तापमान में बैटरी की क्षमता प्रभावित होती है, जबकि तेज हवाएं उड़ान को अस्थिर कर सकती हैं। ऐसे में ‘वायु अस्त्र-1’ का सफल परीक्षण यह संकेत देता है कि भारतीय तकनीक अब कठिन हिमालयी परिस्थितियों में भी प्रभावी तरीके से काम करने में सक्षम हो रही है। मलारी क्षेत्र भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित होने के कारण सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे इलाकों में निगरानी, गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आधुनिक ड्रोन तकनीक की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। माना जा रहा है कि भविष्य में इस तरह के ड्रोन सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना और सुरक्षा एजेंसियों की सहायता कर सकते हैं। दुर्गम इलाकों में मानव पहुंच कठिन होने पर ये ड्रोन रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी ‘वायु अस्त्र-1’ को उपयोगी माना जा रहा है। उत्तराखंड में भूस्खलन, हिमस्खलन, बादल फटने और ग्लेशियर संबंधी घटनाएं लगातार चुनौती बनी रहती हैं। ऐसी स्थिति में राहत और बचाव कार्यों के दौरान ड्रोन तकनीक प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत आकलन करने, लापता लोगों की तलाश और जरूरी सामग्री पहुंचाने में मददगार साबित हो सकती है। स्थानीय लोगों और तकनीकी विशेषज्ञों ने इस परीक्षण को उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के उपयोग से सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन दोनों को नई मजबूती मिलेगी। परीक्षण के बाद संबंधित टीम ने ड्रोन के प्रदर्शन पर संतोष जताया और भविष्य में इसे और उन्नत बनाने की दिशा में काम करने की बात कही। भारत में स्वदेशी रक्षा तकनीकों और ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से काम हुआ है। ‘वायु अस्त्र-1’ का यह सफल परीक्षण उसी अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की तकनीकों को बड़े स्तर पर विकसित किया गया तो भारत भविष्य में रक्षा और निगरानी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। Post Views: 3 Post navigation घनसाली में तेज आंधी से चीड़ का पेड़ गिरा, होमस्टे बाल-बाल बचा