Spread the loveDehradun के Parade Ground में 11 मई 2026 को नर्सिंग एकता मंच का आंदोलन अब बेहद उग्र और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले 158 दिनों से चल रहे इस आंदोलन और 23 दिनों के आमरण अनशन ने आज उस समय गंभीर रूप ले लिया जब प्रदर्शनकारियों ने सरकार से वार्ता विफल होने के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।सुबह के करीब 5 बजे ही परेड ग्राउंड में स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई, जब नर्सिंग एकता मंच से जुड़े 5 अभ्यर्थी और एक राजनीतिक संगठन से जुड़ी महिला नेता ओवरहेड पानी की टंकी पर चढ़ गए। इस घटना ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि जब तक मुख्यमंत्री स्तर से लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे नीचे नहीं उतरेंगे।प्रदर्शन के बीच हालात और गंभीर तब हो गए जब लंबे समय से जारी आमरण अनशन और शारीरिक कमजोरी के कारण कई अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ गई। नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर के अनुसार अब तक करीब 12 अभ्यर्थियों को अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है, जिनमें से 5 की हालत गंभीर होने पर उन्हें ICU में शिफ्ट किया गया है। लगातार अनशन और तनावपूर्ण माहौल के कारण प्रदर्शनकारियों की हालत बिगड़ने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।आज सुबह हुई वार्ता को लेकर भी प्रदर्शनकारियों में भारी निराशा देखी गई। जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के साथ हुई बैठक में किसी भी ठोस निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन सकी। वार्ता विफल होने के बाद प्रदर्शन और अधिक उग्र हो गया, और प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी तेज कर दी। इस बात की पुष्टि कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी की गई है।प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें लंबे समय से जस की तस बनी हुई हैं। उनका कहना है कि नर्सिंग पदों पर वर्षवार मेरिट के आधार पर नियुक्तियां की जाएं, पूर्व की तरह लगभग 2000 पदों पर तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू हो और भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए स्थायी नियमावली लागू की जाए। उनका आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद कोई ठोस भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।मौके पर हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। लगभग 12 से 15 पुलिसकर्मी लगातार टंकी पर चढ़े प्रदर्शनकारियों को सुरक्षित नीचे उतारने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन की टीम प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने की कोशिश में लगी हुई है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल सका है।स्थिति इतनी संवेदनशील हो चुकी है कि पूरे परेड ग्राउंड क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। आसपास के मार्गों पर भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल तैनात है और आम लोगों की आवाजाही को आंशिक रूप से नियंत्रित किया जा रहा है।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल नौकरी की लड़ाई नहीं बल्कि उनके भविष्य और सम्मान की लड़ाई है। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले नर्सिंग स्टाफ की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे उनमें गहरा असंतोष और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन हालात को देखते हुए किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।वर्तमान स्थिति में परेड ग्राउंड एक हाई-अलर्ट ज़ोन में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों की मांगों और सरकार की वार्ता प्रक्रिया पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी किस पर जाएगी—यह बड़ा सवाल बना हुआ है।फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है और प्रशासन लगातार प्रदर्शनकारियों से संपर्क बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह से हालात बिगड़ने से रोके जा सकें। Post Views: 3 Post navigationमौसम विभाग ने 11 से 16 मई तक येलो अलर्ट जारी किया