देहरादून में नर्सिंग भर्ती आंदोलन उग्र, 40 घंटे से पानी की टंकी पर डटीं ज्योति रौतेला, आत्मदाह की कोशिश से मचा हड़कंप
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देहरादून। उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती को लेकर चल रहा आंदोलन अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। उत्तराखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला पिछले करीब 40 घंटे से देहरादून के परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी पर डटी हुई हैं। नर्सिंग अभ्यर्थियों की वर्षवार भर्ती बहाल करने की मांग को लेकर चल रहे इस प्रदर्शन ने मंगलवार को उस समय गंभीर रूप ले लिया जब ज्योति रौतेला ने कथित रूप से अपने ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया।

परेड ग्राउंड में बीते कई दिनों से नर्सिंग अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी सरकार से मांग कर रहे हैं कि सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग भर्ती की पुरानी वर्षवार प्रणाली को दोबारा लागू किया जाए और लंबे समय से खाली पड़े लगभग 2500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि नई भर्ती व्यवस्था के कारण हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है और कई अभ्यर्थी वर्षों से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।

सोमवार सुबह से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन मंगलवार तक लगातार जारी रहा। प्रदर्शन के दौरान ज्योति रौतेला पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गईं और वहीं से सरकार के खिलाफ नारेबाजी करती रहीं। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार लिखित आश्वासन नहीं देती तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। देर रात और सुबह तक प्रशासनिक अधिकारी उन्हें नीचे उतरने के लिए मनाते रहे, लेकिन उन्होंने अपनी मांगों पर अडिग रहने की बात कही।

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शन के दौरान ज्योति रौतेला ने कथित तौर पर अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और आंदोलनकारियों ने तत्काल स्थिति को संभाला। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर दमकल विभाग और चिकित्सा टीमों को भी मौके पर तैनात कर दिया है। परेड ग्राउंड क्षेत्र में भारी पुलिस बल लगाया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

नर्सिंग अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार लगातार केवल आश्वासन दे रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। आंदोलनकारी लिखित आदेश और भर्ती प्रक्रिया की स्पष्ट समयसीमा की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षवार भर्ती प्रणाली समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में पुराने अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ है। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि लंबे इंतजार और बेरोजगारी के कारण वे मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।

इस बीच उत्तराखंड सरकार की ओर से स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि नर्सिंग भर्ती से जुड़ा मामला सरकार के गंभीर विचाराधीन है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे को रखा जाएगा और समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। हालांकि आंदोलनकारियों ने केवल मौखिक आश्वासन लेने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप में आदेश जारी नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस ने सरकार पर युवाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है, जबकि विपक्षी दलों ने कहा कि राज्य में बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी के कारण युवा वर्ग लगातार आक्रोशित हो रहा है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

परेड ग्राउंड में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। कई अभ्यर्थी बीते कई दिनों से धरने पर बैठे हैं और कुछ की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें अस्पताल भी ले जाना पड़ा। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठन और राजनीतिक कार्यकर्ता जुटे हुए हैं। पूरे घटनाक्रम पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

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