मानसून के दौरान उत्तराखंड की नदियों में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध, 30 सितंबर तक लागू रहेगा आदेश
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देहरादून । दैनिक प्रभातवाणी । 

मानसून के मद्देनजर उत्तराखंड सरकार ने जनसुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए राज्य की सभी छोटी और बड़ी नदियों में खनन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। सरकार का यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और आगामी 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में किसी भी नदी, गधेरे या बरसाती जलधाराओं में खनिजों के उत्खनन, निकासी और परिवहन की अनुमति नहीं होगी।

राज्य सरकार का कहना है कि मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने, फ्लैश फ्लड और तेज बहाव की घटनाओं का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसी परिस्थितियों में नदी तटों पर कार्यरत मजदूरों, मशीनों और वाहनों के लिए गंभीर जान-माल का जोखिम उत्पन्न हो जाता है। पूर्व में भी प्रदेश के विभिन्न जिलों में अचानक बाढ़ और भारी बारिश के कारण कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन्हीं जोखिमों को देखते हुए सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए खनन गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध केवल सुरक्षा कारणों से नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने के उद्देश्य से भी लगाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान नदियां अपने प्राकृतिक प्रवाह में रहती हैं और इस समय खनन गतिविधियां नदी के किनारों को कमजोर कर सकती हैं, जिससे कटाव, भूमि धंसने और बाढ़ की तीव्रता बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए नदियों के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम आवश्यक माना जा रहा है।

प्रतिबंध अवधि के दौरान अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, संयुक्त निरीक्षण और चेकिंग अभियान चलाए जाएंगे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी स्थान पर अवैध खनन या खनिज परिवहन की गतिविधि पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।

मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने संवेदनशील नदी तटों और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आधुनिक वार्निंग सायरन प्रणाली स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। इन सायरनों के माध्यम से लोगों को समय रहते संभावित खतरे की जानकारी दी जा सकेगी। पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होने, नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने अथवा बांधों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने की स्थिति में सायरन बजाकर नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क किया जाएगा।

आपदा प्रबंधन विभाग ने नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि भारी बारिश के दौरान नदी किनारे जाने, मछली पकड़ने, खनन क्षेत्रों के आसपास घूमने या जलधाराओं को पार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए सुरक्षित स्थानों की ओर जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मानसून के दौरान आपदा का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में खनन गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध और अग्रिम चेतावनी व्यवस्था जैसी पहलें जनहानि को कम करने और पर्यावरणीय नुकसान को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। सरकार का यह निर्णय मानसून के दौरान मानव जीवन की सुरक्षा, नदी तंत्र के संरक्षण और आपदा जोखिम को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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