Spread the love हरिद्वार/लक्सर, 29 अप्रैल 2026। हरिद्वार जिले के लक्सर क्षेत्र में स्थित एक टायर फैक्ट्री में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक सैकड़ों कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ने लगी। जानकारी के अनुसार दूषित पानी पीने के कारण 250 से अधिक कर्मचारी उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याओं से पीड़ित हो गए। घटना के बाद फैक्ट्री परिसर से लेकर अस्पतालों तक हड़कंप की स्थिति बनी रही। फैक्ट्री में लगभग 6 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं और अचानक बड़ी संख्या में कर्मचारियों के बीमार पड़ने से प्रबंधन और प्रशासन दोनों सक्रिय हो गए। शुरुआत में जिन कर्मचारियों की हालत हल्की थी, उन्हें फैक्ट्री के भीतर बनी डिस्पेंसरी में प्राथमिक उपचार दिया गया। हालांकि, जिन कर्मचारियों की स्थिति गंभीर थी, उन्हें तत्काल लक्सर और हरिद्वार के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि 25 से अधिक कर्मचारियों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जबकि बाकी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कर्मचारियों की तबीयत एक के बाद एक अचानक बिगड़ने लगी, जिससे फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई कर्मचारी एक साथ उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत करने लगे। इस स्थिति को देखते हुए फैक्ट्री प्रबंधन ने तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई और गंभीर मरीजों को अस्पताल भेजा गया। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों की तबीयत दूषित पानी पीने से खराब हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि फैक्ट्री में उपलब्ध कराए जा रहे पानी के सेवन के बाद ही उन्हें यह समस्याएं शुरू हुईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन ने तत्काल फैक्ट्री में टैंकों के जरिए होने वाली पानी की आपूर्ति बंद कर दी है और फिलहाल बाहर से स्वच्छ पानी मंगवाया जा रहा है। फैक्ट्री प्रबंधन ने पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भेज दिए हैं। एचआर हेड आलोक कुमार के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पानी के सैंपल सामान्य पाए गए हैं, लेकिन एक सैंपल को बैक्टीरिया जांच के लिए भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सभी प्रभावित कर्मचारियों की स्थिति फिलहाल स्थिर है और उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा प्रदान की जा रही है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन भी सतर्क हो गया है। अधिकारियों ने फैक्ट्री का निरीक्षण कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर पानी दूषित कैसे हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं। यह घटना एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी फैक्ट्रियों में साफ-सफाई और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। फिलहाल सभी की नजरें लैब रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो इस पूरे मामले की असली वजह सामने ला सकती है। Post Views: 5 Post navigation उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: बंशीलाल राणा बने खाद्य आयुक्त, नंदन डुंगरियाल को UKSSSC की जिम्मेदारी 5 साल बाद मां की गोद में लौटा बेटा, उत्तराखंड पुलिस बनी देवदूत