Spread the loveउत्तराखंड सरकार ने महिलाओं को आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के जिला सहकारी बैंकों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद अब उत्तराखंड के जिला सहकारी बैंकिंग सिस्टम में महिलाओं की भागीदारी पहले से अधिक मजबूत होगी और नेतृत्व स्तर पर भी उनकी उपस्थिति बढ़ेगी। 10 में से 3 जिला सहकारी बैंकों में महिला अध्यक्ष सरकार के इस नए प्रावधान के तहत अब राज्य के 10 जिला सहकारी बैंकों में से कम से कम 3 बैंकों में महिला अध्यक्ष चुनी जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे सहकारी संस्थाओं में महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व को बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से सहकारी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सीमित मानी जाती रही है, लेकिन इस फैसले को महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। महिलाओं को मिलेगा नेतृत्व का अवसर विशेषज्ञों का कहना है कि सहकारी बैंक ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। किसानों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे व्यापारियों को वित्तीय सहायता देने में इन बैंकों की बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का उद्देश्य केवल आरक्षण देना नहीं बल्कि महिलाओं को नेतृत्व और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में सक्रिय रूप से शामिल करना भी है। इससे बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और सामाजिक संतुलन बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संदेश धामी सरकार लगातार महिलाओं के लिए विभिन्न योजनाएं और फैसले लागू कर रही है। इससे पहले भी राज्य सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों, स्वरोजगार योजनाओं और सरकारी सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई कदम उठा चुकी है। अब सहकारी बैंकों में आरक्षण का यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सामाजिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक फैसलों में भागीदारी का अवसर देगा। सहकारी बैंकों में महिला नेतृत्व आने से महिलाओं से जुड़े वित्तीय मुद्दों और योजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना बढ़ेगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा प्रभाव उत्तराखंड के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी बैंक किसानों और छोटे व्यवसायियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थानों में गिने जाते हैं। महिलाओं के नेतृत्व में इन संस्थाओं के संचालन से महिला स्वयं सहायता समूहों, डेयरी, कृषि और छोटे उद्योगों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका और अधिक प्रभावी होगी। सरकार के इस फैसले का महिला संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने स्वागत किया है। कई संगठनों ने इसे महिलाओं की राजनीतिक और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने वाला सकारात्मक कदम बताया है। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड में जंगलों की आग बेकाबू, गांवों तक पहुंची लपटें, 2 लोगों की मौत हरिद्वार गंगा घाट पर बवाल, वायरल वीडियो के बाद श्रद्धालुओं में आक्रोश