भारत में वजन घटाने की दवाओं की मांग बढ़ी: जल्द सस्ती हो सकती हैं मेडिसिन

भारत में वजन घटाने की दवाओं की मांग बढ़ी: जल्द सस्ती हो सकती हैं मेडिसिन
नई दिल्ली। दुनिया भर में मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। वजन कम करने वाली प्रभावी दवाओं की वैश्विक होड़ अब भारत तक पहुँच चुकी है। नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) और एलिलीली (Eli Lilly) जैसी बड़ी दवा कंपनियों की वेट-लॉस दवाएं अब भारत में भी आ चुकी हैं और इनका शुरुआती रिस्पॉन्स काफी सकारात्मक देखा जा रहा है।
बढ़ता बाजार, बढ़ती उम्मीद
हाल ही में नोवो नॉर्डिस्क की लोकप्रिय दवा Wegovy और एलिलीली की Zepbound जैसी दवाएं अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफलता के बाद भारत में भी धीरे-धीरे प्रवेश कर रही हैं। देश में बढ़ते मोटापे और लाइफस्टाइल डिजीज़ के चलते भारत इस क्षेत्र में एक बड़ा बाज़ार बनकर उभर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरी आबादी में वजन और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए दवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है।
फिलहाल कीमत ऊँची, लेकिन राहत जल्द
वर्तमान में इन दवाओं का मासिक खर्च ₹17,000 से ₹26,000 तक आता है, जो आम लोगों की पहुँच से बाहर है। हालांकि, राहत की खबर यह है कि 2026 के बाद ये दवाएं जेनेरिक फॉर्म में उपलब्ध हो सकती हैं, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आने की संभावना है।
कैसे काम करती हैं ये दवाएं?
इन वेट-लॉस दवाओं में GLP-1 नामक हार्मोन को टारगेट किया जाता है, जो भूख को कम करता है और मेटाबोलिज़्म को बेहतर बनाता है। इन दवाओं को डायबिटीज़ के मरीजों के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है, जिससे इनका उपयोग और भी व्यापक हो सकता है।
क्या कहती हैं मेडिकल रिपोर्ट्स?
क्लीनिकल ट्रायल्स में पाया गया कि इन दवाओं के इस्तेमाल से 16–20% तक वजन कम हुआ है। हालांकि, इसका असर व्यक्ति की जीवनशैली, डाइट और नियमितता पर भी निर्भर करता है।
सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि ये दवाएं बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए। इनके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं जैसे – मतली, उलटी, डायरिया या सिरदर्द। साथ ही, दवा बंद करने पर वजन दोबारा बढ़ने की भी संभावना रहती है।
भारत बनेगा वैश्विक केंद्र?
फार्मा इंडस्ट्री का मानना है कि भारत, अपनी बड़ी आबादी और दवा निर्माण क्षमताओं के चलते जल्द ही वेट-लॉस मेडिसिन का निर्माण और निर्यात केंद्र बन सकता है। जेनेरिक दवाओं के आने के बाद इनका उत्पादन बड़े पैमाने पर संभव होगा।
🖋️ रिपोर्ट: दैनिक प्रभातवाणी स्वास्थ्य डेस्क
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