Spread the love 9 जुलाई 2025स्थान: नई दिल्ली / देहरादून ब्यूरो ‘भारत बंद’ का व्यापक असर: ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन बैंकों, परिवहन और शासकीय सेवाओं में भारी प्रभाव; उत्तराखंड में वाम दलों और श्रमिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी देशभर में आज, 9 जुलाई 2025 को 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और प्रमुख किसान संगठनों के आह्वान पर ‘भारत बंद’ का आयोजन किया गया। सरकार की आर्थिक नीतियों, श्रम सुधारों, निजीकरण और महंगाई के खिलाफ यह हड़ताल राष्ट्रव्यापी विरोध में बदल गई है। उत्तराखंड सहित देश के कई राज्यों में इसका सीधा प्रभाव देखा गया। 🔹 हड़ताल के प्रमुख उद्देश्य इस बंद का आह्वान निम्नलिखित मांगों और आपत्तियों के आधार पर किया गया: श्रम कानूनों में बदलाव को वापस लिया जाए सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी मिले महंगाई और बेरोजगारी पर ठोस कदम उठाए जाएँ ठेका प्रथा को समाप्त कर सभी कर्मचारियों को स्थायी किया जाए कर्मचारी भविष्य निधि और पेंशन योजनाओं में कटौती बंद हो उत्तराखंड में बंद का असर उत्तराखंड में वामपंथी दलों, मज़दूर यूनियनों, किसान संगठनों और शिक्षकों की विभिन्न इकाइयों ने इस बंद को समर्थन दिया है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, हल्द्वानी और पौड़ी में कई स्थानों पर रैलियाँ, जुलूस और सड़क पर प्रदर्शन देखे गए। देहरादून में ट्रेड यूनियनों ने जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। हरिद्वार में रोडवेज कर्मचारियों की आंशिक हड़ताल रही। रुद्रपुर में किसानों ने MSP गारंटी कानून की माँग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रभावित सेवाएँ बैंकिंग सेवाएँ: कई सरकारी बैंक शाखाओं में हड़ताल के कारण कामकाज बाधित रहा। ATM सेवा चालू रही, लेकिन नगद निकासी पर असर पड़ा। परिवहन सेवाएँ: राज्य परिवहन की बसें कई रूटों पर नहीं चलीं। टैक्सी यूनियन ने भी आंशिक रूप से काम बंद रखा। सरकारी कार्यालय: कर्मचारियों की उपस्थिति में भारी कमी देखी गई। कुछ स्थानों पर टोकन प्रदर्शन किया गया। शिक्षण संस्थान: सुरक्षा कारणों से कई विद्यालयों और कॉलेजों ने छुट्टी घोषित कर दी। प्रशासन की तैयारी राज्य सरकार ने शांति बनाए रखने के लिए सभी जिलों में पुलिस बलों को हाई अलर्ट पर रखा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स और मजिस्ट्रेटों को भी तैनात किया गया है। अब तक उत्तराखंड में कहीं से भी कोई बड़ी हिंसा की सूचना नहीं आई है। प्रदर्शनकारियों की प्रतिक्रिया देहरादून में एक श्रमिक संगठन के नेता ने कहा: “हम केवल अपनी आवाज़ उठा रहे हैं। श्रमिकों और किसानों के अधिकारों को लगातार कुचला जा रहा है। अगर अब नहीं बोले तो कब बोलेंगे?” सरकारी पक्ष की टिप्पणी सरकारी सूत्रों ने इस हड़ताल को “राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित और राष्ट्र की प्रगति में बाधक” बताया है। सरकार का कहना है कि श्रमिकों और किसानों की समस्याओं को सुलझाने के लिए कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं और संवाद के लिए दरवाज़े खुले हैं। मुख्य बिंदु (Highlight Points): ‘भारत बंद’ का आह्वान 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और प्रमुख किसान संगठनों ने किया। उत्तराखंड में वामपंथी दलों, शिक्षक संघों और किसान संगठनों का समर्थन। बैंकों, परिवहन और सरकारी कार्यालयों में सेवाएँ प्रभावित। महंगाई, निजीकरण, MSP गारंटी और श्रमिक अधिकार हड़ताल के प्रमुख मुद्दे। पुलिस प्रशासन अलर्ट, अब तक कोई हिंसक घटना नहीं। संपादकीय टिप्पणी:दैनिक प्रभातवाणी देश में लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत बनाए रखने वाले आंदोलनों का समर्थन करता है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि आम नागरिकों को असुविधा से बचाया जाए और विरोध की अभिव्यक्ति शांतिपूर्ण और संवैधानिक मर्यादाओं में हो। Post Views: 160 Post navigation कुत्ते के काटने से नेशनल कबड्डी खिलाड़ी की मौत, इलाज में लापरवाही बनी जानलेवा गुफा में आध्यात्मिक साधना करती मिली रूसी महिला, दो बेटियाँ भी साथ — वीजा 8 साल पहले हो चुका है समाप्त