March 1, 2026

देहरादून में साइबर ठगी: फर्जी CBI अधिकारी बनकर रिटायर्ड अफसर से ₹64.65 लाख की डिजिटल लूट

देहरादून में साइबर ठगी: फर्जी CBI अधिकारी बनकर रिटायर्ड अफसर से ₹64.65 लाख की डिजिटल लूट
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दैनिक प्रभातवाणी | अपराध एवं साइबर सुरक्षा विशेष
दिनांक: 31 जनवरी 2026 | स्थान: देहरादून

देहरादून में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने लाया है, जिसमें खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर उत्तराखंड जल निगम के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी से ₹64.65 लाख की रकम ठग ली गई। इस घटना ने न सिर्फ साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि किस तरह अपराधी अब “डिजिटल गिरफ्तारी” जैसे नए हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, ठगों ने पीड़ित सेवानिवृत्त अधिकारी से फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया। कॉल करने वालों ने खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम पर मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गंभीर आर्थिक अपराधों की जांच चल रही है। बात को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र, सरकारी मुहरों जैसे दस्तावेज और वीडियो कॉल पर वर्दीधारी अधिकारियों जैसी पृष्ठभूमि का इस्तेमाल किया।

ठगों ने पीड़ित को मानसिक दबाव में लेते हुए यह भी कहा कि यदि वह जांच में सहयोग नहीं करेंगे तो उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसी दौरान उन्हें बताया गया कि वे “डिजिटल निगरानी” और “डिजिटल गिरफ्तारी” के दायरे में हैं और किसी से भी संपर्क नहीं कर सकते। डर और तनाव के माहौल में फंसे सेवानिवृत्त अधिकारी से विभिन्न खातों में किस्तों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए, जो कुल मिलाकर ₹64.65 लाख तक पहुंच गए।

कुछ समय बाद जब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ, तब उन्होंने देहरादून पुलिस से संपर्क किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम सेल ने तत्काल जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह का काम प्रतीत होता है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को इसी तरह निशाना बना रहा है। आरोपियों के बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रेल की गहन जांच की जा रही है।

पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से अपील की है कि कोई भी केंद्रीय एजेंसी, चाहे वह सीबीआई हो या कोई अन्य, इस तरह फोन या वीडियो कॉल पर “डिजिटल गिरफ्तारी” नहीं करती और न ही पैसे ट्रांसफर करने को कहती है। यदि किसी को इस प्रकार का कॉल आए तो तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए और किसी भी दबाव में आकर पैसे या व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं, खासकर बुजुर्गों और सेवानिवृत्त अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह के साइबर फर्जीवाड़े से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।