रुड़की गैंगरेप केस में चौंकाने वाला खुलासा: पहले मामले के आरोपी ही निकले दूसरी वारदात के दोषी
ajaysemalty98 February 10, 2026
देहरादून | 10 फरवरी 2026 | उत्तराखंड | दैनिक प्रभातवाणी
उत्तराखंड में हाल के दिनों में जिस तरह से अपराध की घटनाएँ सामने आ रही हैं, उसने आम लोगों के मन में असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है। राजधानी देहरादून से लेकर औद्योगिक जिला उधम सिंह नगर और धर्मनगरी हरिद्वार तक, लगातार सामने आ रही गंभीर आपराधिक वारदातें यह संकेत दे रही हैं कि राज्य की कानून व्यवस्था एक कठिन दौर से गुजर रही है। इसी क्रम में हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र से सामने आई दो सनसनीखेज घटनाओं ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
रुड़की के एक ही गांव में दो अलग-अलग महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटनाएँ सामने आना अपने आप में बेहद गंभीर मामला है। चौंकाने वाली बात यह है कि पहली महिला के साथ गैंगरेप के मामले में जिन आरोपियों को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जांच के दौरान वही आरोपी दूसरी महिला के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की वारदात में भी शामिल पाए गए। दूसरी पीड़िता की शिकायत पर जब पुलिस ने गहन जांच शुरू की, तो दोनों मामलों में अपराध का तरीका, घटनास्थल और आरोपियों का व्यवहार लगभग एक जैसा पाया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी एक ही पैटर्न पर लगातार अपराध कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार, तीन आरोपियों में से मेहरबान और अब्दुल रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि तीसरा आरोपी अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
पहले मामले में नशा, अश्लील वीडियो और लंबे समय तक शोषण की कहानी सामने आई है। रुड़की कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 36 वर्षीय महिला ने पुलिस को बताया कि उसका पति ईंट भट्टे पर मजदूरी करता है और करीब छह महीने पहले काम के सिलसिले में कोटद्वार चला गया था। पति के बाहर जाने के बाद उसका एक परिचित, जो पति का ही दोस्त बताया जा रहा है, महिला के घर आने-जाने लगा। महिला का आरोप है कि इसी विश्वास का फायदा उठाते हुए आरोपी ने एक दिन उसके घर आकर कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उसे पिला दिया। नशे की हालत में महिला होश में नहीं रही, इसी दौरान आरोपी ने अपने दो अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया। इसके बाद तीनों ने मिलकर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
इतना ही नहीं, पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान एक आरोपी ने पूरी घटना का अश्लील वीडियो मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। बाद में इसी वीडियो के आधार पर उसे डराया-धमकाया गया और लंबे समय तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। महिला ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
दूसरा मामला सामने आने के बाद पूरे गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। दूसरी पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि उसके साथ भी लगभग इसी तरह की साजिश रची गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले से ही पीड़िता की गतिविधियों पर नजर रखी हुई थी और मौका मिलते ही वारदात को अंजाम दिया गया। दोनों मामलों की समानता ने यह साफ कर दिया कि आरोपी सुनियोजित तरीके से महिलाओं को निशाना बना रहे थे।
इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब आरोपी पहले ही एक जघन्य अपराध में जेल भेजे जा चुके थे, तो उनके आपराधिक इतिहास और नेटवर्क की गहराई से जांच क्यों नहीं की गई। यदि समय रहते उनकी गतिविधियों पर सख्त निगरानी होती, तो शायद दूसरी वारदात को रोका जा सकता था।
हरिद्वार पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को तेज कर दिया गया है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है और पीड़िताओं को हर संभव कानूनी व मानसिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इन आरोपियों का संबंध किसी बड़े आपराधिक गिरोह से तो नहीं है।
इस घटना ने एक बार फिर राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि त्वरित न्याय और कठोर सजा ही समाज में डर पैदा कर सकती है, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
कुल मिलाकर, रुड़की की इन दो घटनाओं ने उत्तराखंड में कानून व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। यह केवल एक जिले या एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए चेतावनी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस और प्रशासन इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और क्या पीड़ितों को समय पर न्याय मिल पाता है या नहीं।