कांग्रेस ने बजट सत्र लंबा करने की माँग की, मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर उठाए अहम सवाल
ajaysemalty98 February 13, 2026
देहरादून | उत्तराखंड | दैनिक प्रभातवाणी
प्रदेश में जारी बजट सत्र की अवधि को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने बजट सत्र को तीन सप्ताह तक बढ़ाने की माँग करते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस का कहना है कि वर्तमान सत्र की अवधि प्रदेश की जमीनी समस्याओं पर गंभीर और विस्तृत चर्चा के लिए अपर्याप्त है, जिसके चलते कई अहम मुद्दे अधूरे रह जा रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार का ध्यान कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, पेयजल संकट, बेरोजगारी और महंगाई जैसे विषयों की ओर आकर्षित किया है। पार्टी का तर्क है कि ये सभी मुद्दे सीधे आम जनता से जुड़े हुए हैं और इन पर विधानसभा के भीतर विस्तार से चर्चा होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनिवार्यता है। कांग्रेस का आरोप है कि सीमित अवधि के सत्र में सरकार केवल औपचारिकताएँ पूरी कर रही है, जबकि विपक्ष को जनहित के सवाल उठाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश के कई जिलों में अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। महिला सुरक्षा को लेकर भी पार्टी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के अनुसार, महिला अपराधों के मामलों में सख्त कार्रवाई और ठोस नीति पर चर्चा के लिए सदन में पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए, ताकि सरकार से जवाबदेही तय की जा सके।
ज्ञापन में पेयजल संकट को भी एक गंभीर मुद्दे के रूप में उठाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक कई स्थानों पर लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। गर्मी के मौसम से पहले ही जल संकट गहराने लगा है, लेकिन इस पर सदन में ठोस चर्चा और समाधान की दिशा में कोई स्पष्ट पहल नहीं दिख रही है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया है कि बजट सत्र के दौरान विपक्ष के सवालों और प्रस्तावों को नजरअंदाज किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि बजट सत्र केवल सरकारी घोषणाओं तक सीमित न रहकर जनसमस्याओं के समाधान का मंच होना चाहिए। इसके लिए सत्र की अवधि बढ़ाना आवश्यक है, ताकि विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएँ प्रभावी ढंग से सदन में रखने का अवसर मिल सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह माँग केवल सत्र की अवधि बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से वह सरकार पर बढ़ते दबाव को भी दर्शा रही है। पिछले कुछ समय से प्रदेश में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। बजट सत्र को लंबा करने की माँग उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
वहीं, सरकार की ओर से अभी इस माँग पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सत्तारूढ़ दल के सूत्रों का कहना है कि सत्र की अवधि से जुड़े फैसले कार्यसूची और विधायी जरूरतों के आधार पर किए जाते हैं। हालांकि, विपक्ष के दबाव और जनहित से जुड़े मुद्दों को देखते हुए सरकार इस माँग पर विचार कर सकती है।
प्रदेश की राजनीति पर नजर रखने वालों का कहना है कि यदि बजट सत्र की अवधि बढ़ाई जाती है, तो आने वाले दिनों में सदन के भीतर तीखी बहस देखने को मिल सकती है। इससे न केवल सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ेगा, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा होने की संभावना बनेगी।
फिलहाल, कांग्रेस की ओर से बजट सत्र को तीन सप्ताह तक बढ़ाने की माँग ने प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस माँग को स्वीकार करती है या मौजूदा अवधि में ही सत्र को समाप्त करने का फैसला लेती है।