राहुल गांधी का पीए बनकर ठगी करने वाला अमृतसर का शातिर आरोपी गिरफ्तार, कांग्रेस नेताओं से करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा
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देहरादून से एक बड़ा और चौंकाने वाला ठगी का मामला सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। खुद को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का करीबी सहयोगी और निजी सचिव बताकर कई राज्यों के कांग्रेस नेताओं से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान पंजाब के अमृतसर निवासी गौरव कुमार के रूप में हुई है, जिसने फर्जी नाम “कनिष्क सिंह” बनाकर एक संगठित तरीके से इस पूरे रैकेट को अंजाम दिया।

यह गिरफ्तारी देहरादून के जाखन क्षेत्र से की गई है, जहां पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी एक कांग्रेस नेता से पैसे लेने के लिए पहुंचने वाला है। पुलिस ने पहले से ही जाल बिछाकर उसे मौके पर ही दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले की परतें धीरे-धीरे खुलने लगीं और सामने आया कि यह ठगी सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक पूरा नेटवर्क काम कर रहा था।

जानकारी के अनुसार यह मामला तब सामने आया जब कांग्रेस की उत्तराखंड इकाई की एक वरिष्ठ नेता भावना पांडे ने राजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि एक व्यक्ति ने खुद को कनिष्क सिंह बताते हुए और राहुल गांधी का निजी सचिव होने का दावा करते हुए उनसे संपर्क किया था। आरोपी ने पार्टी में बड़ा पद दिलाने और राजनीतिक सर्वेक्षण में शामिल करने का झांसा देकर पहले 25 लाख रुपये की मांग की और बाद में एक सहयोगी के माध्यम से यह रकम हासिल भी कर ली।

पैसे मिलने के बाद आरोपी ने संपर्क बंद कर दिया, जिससे शक गहरा गया और अंततः पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान मोबाइल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस को अहम सुराग मिले और आरोपी तक पहुंच बनाई गई।

पुलिस पूछताछ में इस ठगी का तरीका बेहद चौंकाने वाला सामने आया। आरोपी गौरव कुमार ने स्वीकार किया कि उसने इंटरनेट के माध्यम से राहुल गांधी के करीबी रहे कनिष्क सिंह के बारे में जानकारी जुटाई थी। इसके बाद उसने ट्रूकॉलर और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फर्जी पहचान तैयार की और खुद को उसी नाम से पेश करना शुरू किया। इतना ही नहीं, उसने विभिन्न वेबसाइटों से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की जानकारी भी जुटाई ताकि वह भरोसेमंद तरीके से लोगों को फंसाने में सफल हो सके।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अकेले नहीं था, बल्कि उसके साथ पंजाब के ही तीन अन्य साथी भी इस ठगी में शामिल थे, जिनके नाम छज्जू, रजत मदान और मनिंदर सिंह कालू बताए जा रहे हैं। यह पूरा गिरोह अलग-अलग राज्यों में सक्रिय था और राजनीतिक प्रभाव तथा पद दिलाने का झांसा देकर लोगों से मोटी रकम ऐंठता था।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि इस गिरोह ने राजस्थान के जयपुर में दो नेताओं को विधायक का टिकट दिलाने के नाम पर लगभग दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की थी। इसके अलावा बिहार के पटना में भी एक नेता से तीन लाख रुपये की धोखाधड़ी करने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ था और लगातार राजनीतिक पहचान का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बना रहा था।

देहरादून पुलिस के अनुसार आरोपी का तरीका बेहद योजनाबद्ध था। पहले वह खुद को किसी बड़े राजनीतिक पद से जुड़ा बताता था, फिर धीरे-धीरे भरोसा जीतकर पैसे की मांग करता था। इसके बाद वह संपर्क तोड़ देता था और नए लोगों को अपने जाल में फंसाने लग जाता था। इस तरह यह नेटवर्क लगातार बढ़ता जा रहा था।

इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी हड़कंप मच गया है। कांग्रेस नेताओं में इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि कैसे एक फर्जी व्यक्ति इतने बड़े स्तर पर पार्टी की छवि का इस्तेमाल कर सकता है। वहीं पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और अन्य राज्यों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

देहरादून पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगा है और उनकी कुल धोखाधड़ी कितनी बड़ी है।

यह मामला केवल एक ठगी नहीं बल्कि डिजिटल युग में बढ़ते साइबर और फर्जी पहचान आधारित अपराधों की गंभीर तस्वीर भी दिखाता है, जहां लोग राजनीतिक प्रभाव और पद की लालच में आसानी से धोखे का शिकार हो जाते हैं।

फिलहाल आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और पुलिस उसके अन्य साथियों की तलाश में जुटी है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल किस तरह बड़े स्तर पर संगठित अपराध को जन्म दे सकता है।

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