चंपावत नाबालिग गैंगरेप केस में नया मोड़, आरोपी परिवारों ने लगाए साजिश के आरोप
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उत्तराखंड, जिसे अपनी शांति और आध्यात्मिक चेतना के लिए ‘देवभूमि’ कहा जाता है, आज एक ऐसी घिनौनी घटना से दहल उठा है जिसने मानवता और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीमांत जिले चंपावत में एक नाबालिग लड़की के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म ने न केवल स्थानीय लोगों के गुस्से को भड़का दिया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है।
घटना का विस्तृत विवरण: एक काली रात की कहानी
यह घटना उस समय की है जब एक नाबालिग किशोरी अपने एक करीबी मित्र की शादी के समारोह में शामिल होकर घर लौट रही थी। चंपावत के ग्रामीण क्षेत्र में रास्ते में घात लगाए बैठे तीन दरिंदों ने उसे अकेला पाकर दबोच लिया। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने पीड़िता को डरा-धमकाकर एक सुनसान कमरे में ले जाकर बंधक बना लिया।
वहां मौजूद तीन युवकों ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघते हुए नाबालिग के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया कि उसे रात भर बंधक बनाकर रखा गया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी गई। सुबह जब आरोपी सो गए या किसी काम से बाहर निकले, तो पीड़िता किसी तरह वहां से भागने में सफल रही और बदहवास हालत में अपने घर पहुँची।
आरोपियों की पहचान और राजनीतिक रसूख
जैसे ही यह मामला पुलिस के पास पहुँचा और जांच शुरू हुई, इसमें चौंकाने वाले खुलासे हुए। मुख्य आरोपियों में क्षेत्र के एक स्थानीय भाजपा नेता (पूर्व मंडल पदाधिकारी) का नाम सामने आया। इसके अलावा, आरोपियों में एक पूर्व प्रधान और एक सेना के ‘अग्निवीर’ जवान का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
राजनीतिक रसूख वाले व्यक्तियों का नाम सामने आते ही मामले ने तूल पकड़ लिया। हालांकि, भाजपा के जिला और प्रदेश नेतृत्व ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी नेता को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने की घोषणा कर दी है, लेकिन जनता का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है।
जनता का आक्रोश: सड़कों पर उतरा जनसैलाब
आज सुबह चंपावत की सड़कों पर वह मंजर था जिसे दशकों से नहीं देखा गया। “बेटी को न्याय दो” और “आरोपियों को फांसी दो” के नारों से पूरा शहर गूँज उठा।
  • बाजार पूर्णतः बंद: व्यापार मंडल के आह्वान पर चंपावत के सभी मुख्य बाजार और दुकानें बंद रहीं। व्यापारियों का कहना है कि जब तक आरोपियों को कठोर सजा नहीं मिलती, वे चुप नहीं बैठेंगे।
  • कोतवाली का घेराव: सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और युवाओं ने स्थानीय कोतवाली का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई।
  • सोशल मीडिया पर कैंपेन: फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर #JusticeForChampawatDaughter ट्रेंड कर रहा है, जिसमें लोग अपराधियों के घर पर बुलडोजर चलाने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक घमासान: विपक्ष के तीखे वार
इस घटना ने उत्तराखंड की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। विपक्षी दल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं क्योंकि उन्हें “सत्ता का संरक्षण” प्राप्त है।
  • यशपाल आर्य (नेता प्रतिपक्ष) ने कहा, “यह देवभूमि के माथे पर कलंक है। जब सत्ताधारी दल के नेता ही भक्षक बन जाएं, तो बेटियां कहाँ सुरक्षित रहेंगी?”
  • पुतला दहन: कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देहरादून, हल्द्वानी और अल्मोड़ा में मुख्यमंत्री और सरकार का पुतला फूँका।
प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई
चंपावत पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई का दावा किया है। जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) ने प्रेस वार्ता में बताया:
  1. कड़ी धाराएं: आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म (IPC 376D) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
  2. SIT का गठन: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है जो वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाएगी।
  3. गिरफ्तारी: पुलिस ने तीन मुख्य संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है और उनसे गुप्त स्थान पर पूछताछ की जा रही है।
देवभूमि की साख पर सवाल
अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद उत्तराखंड में यह एक और ऐसी घटना है जिसने महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। चंपावत की यह घटना इसलिए भी ज्यादा गंभीर है क्योंकि इसमें रसूखदार लोग शामिल हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहाड़ों की शांत वादियों में अब अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं।