धर्मांतरण और पवित्रता पर प्रहार! हरिद्वार में संतों ने किया बड़ा खुलासा, ऑनलाइन मंगाई गई बिरयानीहरिद्वार:तीर्थ नगरी हरिद्वार की पवित्रता को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के साधु-संतों ने प्रशासन के दावों की पोल खोलने के लिए एक 'स्टिंग ऑपरेशन' किया, जिसमें प्रतिबंधित क्षेत्र में ऑनलाइन फूड डिलीवरी के जरिए मांसाहारी भोजन (बटर चिकन और बिरयानी) मंगवाया गया।क्या है पूरा मामला?हरिद्वार में गंगा किनारे और कुंभ क्षेत्र में मांस-मदिरा की बिक्री और डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद, संतों को सूचना मिल रही थी कि ऑनलाइन फूड ऐप्स के माध्यम से गुपचुप तरीके से मांसाहारी भोजन की सप्लाई की जा रही है।इसकी पुष्टि के लिए संतों ने खुद एक मोबाइल ऐप से बिरयानी और बटर चिकन का ऑर्डर दिया। ताज्जुब की बात यह रही कि गंगा तट के पास स्थित सरकारी गेस्ट हाउस जैसे संवेदनशील इलाके में, ऑर्डर देने के महज 17 मिनट के भीतर डिलीवरी बॉय भोजन लेकर पहुँच गया।प्रशासन के दावों की खुली पोलजैसे ही डिलीवरी बॉय भोजन लेकर पहुँचा, संतों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। इस दौरान संतों ने पूरी घटना का वीडियो बनाया और दिखाया कि कैसे नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।अखाड़े के संतों का कहना है:"प्रशासन दावा करता है कि हरिद्वार में मांस की बिक्री बंद है, लेकिन मोबाइल ऐप्स के जरिए यह जहर घर-घर और घाट-घाट पहुँच रहा है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ भी है।"प्रमुख बिंदु:तेज डिलीवरी: प्रतिबंधित क्षेत्र में केवल 17 मिनट में चिकन-बिरयानी की डिलीवरी।नियमों का उल्लंघन: ५ किमी के दायरे में मांस पर लगे बैन का मखौल।संतों की मांग: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने इस घटना पर कड़ा रोष जताया है और संबंधित फूड डिलीवरी कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।आगे की कार्रवाईइस स्टिंग ऑपरेशन के बाद शहर में हड़कंप मच गया है। संतों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इन ऑनलाइन कंपनियों पर नकेल नहीं कसी और तीर्थ क्षेत्र की मर्यादा को बहाल नहीं किया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। हरिद्वार में ऑनलाइन बिरयानी डिलीवरी पर संतों का हंगामा, तीर्थ क्षेत्र की पवित्रता पर उठे सवाल https://images.openai.com/static-rsc-4/Q9gH8hiKhTDejth-MS1koPFiu8AMW71xi6L767cVUg3S7k2EO0z5f66240ofiUhWXz3SFMP28Tm-3MDYRCds0UOOEmgfo4NHKqy_cQ-DzsuzRijFe_PpiWElqeBhf01I6w3JrhdV_LQYA-5oJQBSXOBCHvRcBCjnOcgGYIILTfKjZThhzaGcQlImOo1wVmQl?purpose=fullsize https://images.openai.com/static-rsc-4/GyTaRfgbaVi5zDSf7E8G3L_wm_9HU4pDtbNM7JGoQTgu18ZPKmcA89lgOo4k7yFYouNKG9S8xh5FK-Tz2uaTRgm_zgJL4fX_hNOpjY2rHlV9VGBsSvED-EYmHsbgHP5wPN5L7PHIg9Onkfn_HS6SBHVwbYT_UOm8YPROMxdzcmavXfCRe1In44x78hLF1vM6?purpose=fullsize https://images.openai.com/static-rsc-4/fNQkU3lxhaw86wtwW1-QcueVGetbt7fyXDMZo977Q8IEoq_Iz-NwuQLO4PuK9GS_RHEUWRMAqy7kBKIenJ61Tuo1laISstJTVq1XnN4e-y2gm9AzhYGgoajx1JdYenQXL_FJ9qUkslOzcHHlW7bYQyvF8MMW-EFcQz1WIpOeHa9fKsv8xT6v1pbccykOfOid?purpose=fullsize https://images.openai.com/static-rsc-4/cy3_hU3I4pcUtD98zVzjzkWiq-bH1a0NPOWgTlReCljMfSsmc5xVzzsPWfWM3rBEoGKyF1RWtaQDzCsC3m9cAA1XsN58fvXpm3d3zHVX-4YN4XlcCW3OoCVHo7j4xiWYbBWzChFv-yta_sMr1Wn_FFtWtBEm6I4hdhaxMrCwA1v0SqSJCv-e5ZvtUUytOCW5?purpose=fullsize 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आसपास, जहां मांस और मदिरा की बिक्री प्रतिबंधित है, वहां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए गुप्त रूप से नॉनवेज भोजन की सप्लाई हो रही है। इन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए अखाड़े के कुछ संतों ने स्वयं मोबाइल ऐप के माध्यम से बिरयानी और बटर चिकन का ऑर्डर किया। बताया जा रहा है कि ऑर्डर प्रतिबंधित माने जाने वाले क्षेत्र के भीतर स्थित एक सरकारी गेस्ट हाउस के पास मंगवाया गया था। संतों का दावा है कि ऑर्डर देने के लगभग 17 मिनट के भीतर ही डिलीवरी बॉय भोजन लेकर मौके पर पहुंच गया। इसके बाद संतों ने डिलीवरी कर्मी को रोककर पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड किया और आरोप लगाया कि प्रशासन के प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित हैं। संतों ने कहा कि यदि वास्तव में तीर्थ क्षेत्र में मांस बिक्री पर प्रतिबंध लागू है, तो फिर ऑनलाइन ऐप्स के माध्यम से इस तरह की डिलीवरी कैसे संभव हो रही है। घटना के बाद अखाड़े से जुड़े संतों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। उनका कहना है कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं बल्कि सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रतिबंधित क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन की आपूर्ति तीर्थ की गरिमा को प्रभावित करती है। संत समाज ने आरोप लगाया कि प्रशासन ऑफलाइन दुकानों पर तो कार्रवाई दिखाता है, लेकिन ऑनलाइन माध्यमों से हो रही डिलीवरी पर कोई प्रभावी निगरानी नहीं है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़े कई संतों ने मांग की है कि संबंधित फूड डिलीवरी कंपनियों और रेस्तरां के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी मांग उठाई गई है कि तीर्थ क्षेत्र में जीपीएस आधारित डिजिटल निगरानी लागू की जाए ताकि प्रतिबंधित इलाकों में किसी भी प्रकार की मांसाहारी डिलीवरी स्वतः ब्लॉक हो सके। https://images.openai.com/static-rsc-4/O09FwcxE1Vc6qA0MmvcXzMLqD5eJuJawKMxHDb6hd1oPr_qH_PTvgDzyHEzsRLP97xYT0rRPMBjpHZARk0fSzyxGtf2OsiQs4JHcPiZVJeRZ0RAHy2jXxaf5NqKhi27G0USVYDLIg1wLOzwQJ_LJtxs-xJkJVB1VYYd1XSRIc9K6XvSBT5U6Os80NjePj5wT?purpose=fullsize 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हरिद्वार। धर्मनगरी Haridwar में तीर्थ क्षेत्र की पवित्रता और धार्मिक मर्यादा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के संतों ने एक कथित “स्टिंग ऑपरेशन” के जरिए दावा किया है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स के माध्यम से मांसाहारी भोजन आसानी से पहुंचाया जा रहा है। इस घटना के बाद संत समाज में भारी रोष देखने को मिल रहा है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

संतों के अनुसार, लंबे समय से उन्हें शिकायतें मिल रही थीं कि गंगा तट और कुंभ क्षेत्र के आसपास, जहां मांस और मदिरा की बिक्री प्रतिबंधित है, वहां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए गुप्त रूप से नॉनवेज भोजन की सप्लाई हो रही है। इन आरोपों की सच्चाई जानने के लिए अखाड़े के कुछ संतों ने स्वयं मोबाइल ऐप के माध्यम से बिरयानी और बटर चिकन का ऑर्डर किया। बताया जा रहा है कि ऑर्डर प्रतिबंधित माने जाने वाले क्षेत्र के भीतर स्थित एक सरकारी गेस्ट हाउस के पास मंगवाया गया था।

संतों का दावा है कि ऑर्डर देने के लगभग 17 मिनट के भीतर ही डिलीवरी बॉय भोजन लेकर मौके पर पहुंच गया। इसके बाद संतों ने डिलीवरी कर्मी को रोककर पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड किया और आरोप लगाया कि प्रशासन के प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित हैं। संतों ने कहा कि यदि वास्तव में तीर्थ क्षेत्र में मांस बिक्री पर प्रतिबंध लागू है, तो फिर ऑनलाइन ऐप्स के माध्यम से इस तरह की डिलीवरी कैसे संभव हो रही है।

घटना के बाद अखाड़े से जुड़े संतों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय है। उनका कहना है कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं बल्कि सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु गंगा स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रतिबंधित क्षेत्रों में मांसाहारी भोजन की आपूर्ति तीर्थ की गरिमा को प्रभावित करती है।

संत समाज ने आरोप लगाया कि प्रशासन ऑफलाइन दुकानों पर तो कार्रवाई दिखाता है, लेकिन ऑनलाइन माध्यमों से हो रही डिलीवरी पर कोई प्रभावी निगरानी नहीं है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से जुड़े कई संतों ने मांग की है कि संबंधित फूड डिलीवरी कंपनियों और रेस्तरां के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी मांग उठाई गई है कि तीर्थ क्षेत्र में जीपीएस आधारित डिजिटल निगरानी लागू की जाए ताकि प्रतिबंधित इलाकों में किसी भी प्रकार की मांसाहारी डिलीवरी स्वतः ब्लॉक हो सके।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय लोगों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक मर्यादा से जुड़ा गंभीर विषय मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि प्रशासन को स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनानी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद पैदा न हों।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार मामले की जांच की तैयारी की जा रही है। संतों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हरिद्वार में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

दैनिक प्रभातवाणी लगातार इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।

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