हरिद्वार के जंगल में बाघ की निर्मम हत्या, पंजे काटकर शिकार की आशंका — वन विभाग ने एक आरोपी को दबोचा
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Haridwar के श्यामपुर रेंज अंतर्गत सजनपुर बीट के जंगलों में एक ही दिन में दो बाघों की संदिग्ध मौत ने पूरे वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। पहले एक युवा नर बाघ का शव बरामद हुआ और उसके कुछ ही घंटों बाद पास के क्षेत्र से एक मादा बाघ का शव भी मिलने से सनसनी फैल गई। दोनों शवों की स्थिति देखकर अवैध शिकार की आशंका गहरा गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों बाघों को जहरीला मांस खिलाकर मारा गया और बाद में उनके पंजे काट लिए गए।

घटना सामने आने के बाद जंगल क्षेत्र में हड़कंप मच गया। वन विभाग, राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीमें लगातार इलाके में सर्च अभियान चला रही हैं। अधिकारियों को आशंका है कि मृत बाघ और बाघिन भाई-बहन थे और संभवतः अपनी मां के साथ जंगल में रह रहे थे। अब विभाग को यह डर भी सता रहा है कि कहीं उनकी मां भी इस जहरीले शिकार का शिकार न हो गई हो।

जानकारी के अनुसार, 18 मई की शाम को वन विभाग की टीम नियमित गश्त और सर्चिंग के दौरान श्यामपुर कंपार्टमेंट संख्या 9 क्षेत्र में पहुंची थी। इसी दौरान जंगल में करीब दो वर्षीय नर बाघ का शव मिला। शव क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा था और उसके चारों पैर कटे हुए थे। हालांकि बाघ की खाल और दांत मौके पर सुरक्षित मिले, जिससे माना जा रहा है कि आरोपी पूरी तरह शव को ठिकाने लगाने या अंग निकालने की तैयारी नहीं कर पाए थे।

घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक मृत भैंस का शव भी मिला। जांच के दौरान वन अधिकारियों को शक हुआ कि भैंस के मांस में किसी जहरीले पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कुछ दिन पहले बाघिन ने वन गुर्जरों की एक भैंस का शिकार किया था। इसके बाद कथित तौर पर भैंस के शव पर जहरीला पदार्थ छिड़क दिया गया, ताकि जब बाघ दोबारा मांस खाने आएं तो उनकी मौत हो जाए।

बताया जा रहा है कि जैसे ही बाघों ने जहरीले मांस को खाया, उनकी मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने बाघों के पंजे काट दिए। वन विभाग को शक है कि इन अंगों को अवैध वन्यजीव तस्करी नेटवर्क में बेचने की तैयारी थी, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बाघ के अंगों की भारी मांग रहती है।

वन विभाग की टीम अभी इस मामले की जांच कर ही रही थी कि 19 मई को दिन में घटनास्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक गदेरे में मादा बाघ का शव भी बरामद हुआ। आरोपी शव को पत्तों से ढककर छिपाने की कोशिश कर चुके थे। मादा बाघ के भी पैर कटे पाए गए। इसके बाद पूरे क्षेत्र में और ज्यादा सर्चिंग शुरू कर दी गई।

Uttarakhand Forest Department ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई की। जांच के दौरान एक वन गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान आलम उर्फ फम्मी पुत्र शमशेर निवासी गुर्जर डेरा, श्यामपुर कंपार्टमेंट संख्या 9 के रूप में हुई है। वहीं उसके तीन साथी आमिर हमजा उर्फ मियां, आशिक और जुप्पी फरार बताए जा रहे हैं। वन विभाग का दावा है कि फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

वन अधिकारियों का कहना है कि आरोपी रात के अंधेरे में बाघों की खाल उतारने और दांत निकालने की तैयारी में थे, लेकिन उससे पहले वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिल गई। सूचना मिलते ही टीम ने इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया और पूरे मामले का खुलासा हो गया।

यह पूरा क्षेत्र Rajaji Tiger Reserve के बफर जोन के बेहद संवेदनशील इलाकों में माना जाता है। यहां बाघ और हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में एक साथ दो बाघों की मौत ने विभागीय निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्र में नियमित और सघन गश्त होती, तो शायद इतनी बड़ी घटना को रोका जा सकता था।

वन विभाग की जांच में यह भी सामने आया है कि श्यामपुर रेंज के सिद्ध स्रोत और खारा क्षेत्र में वन गुर्जरों के डेरे लगातार बढ़ रहे हैं। आरोप है कि कई बार भैंसों को रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र तक चराने ले जाया जाता है, जिससे वन्यजीवों और इंसानों के बीच टकराव की स्थिति बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से वन्यजीवों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।

फिलहाल वन विभाग की टीमें लगातार जंगल में सर्च अभियान चला रही हैं। मृत बाघों की मां की तलाश भी जारी है। अधिकारियों को डर है कि यदि उसने भी जहरीला मांस खाया होगा तो उसके साथ भी अनहोनी हो सकती है। पूरे मामले की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है और वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड में वन्यजीव सुरक्षा, अवैध शिकार और जंगलों में बढ़ते मानव हस्तक्षेप को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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