Spread the love Laksar में प्रशासन और पत्रकारों के बीच शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। गतिरोध खत्म करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों और पत्रकार प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। बैठक के बेनतीजा रहने के बाद पत्रकारों ने आंदोलन को तेज करने का एलान करते हुए 29 मई से तहसील परिसर में बेमियादी धरने पर बैठने की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र का माहौल गर्मा गया है और मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार विवाद की शुरुआत 22 मई को हुई थी। बताया जा रहा है कि Laksar Press Club के अध्यक्ष और तहसील कर्मचारियों के बीच किसी मुद्दे को लेकर तीखी बहस हो गई थी। मामूली कहासुनी देखते ही देखते विवाद में बदल गई और दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई। घटना के बाद पत्रकारों में भारी नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए। पत्रकारों का आरोप है कि तहसील परिसर में उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और मामले को गंभीरता से लेने के बजाय प्रशासन ने उसे नजरअंदाज करने की कोशिश की। इसी को लेकर पत्रकार संगठनों ने बैठक कर आंदोलन की रणनीति तैयार की। पत्रकारों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और भविष्य में पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन की ओर से मामले को शांत कराने के लिए वार्ता आयोजित की गई। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों और पत्रकार प्रतिनिधियों ने अपने-अपने पक्ष रखे। कई घंटों तक चली बातचीत के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी। सूत्रों के अनुसार पत्रकार अपनी मांगों पर अड़े रहे, जबकि प्रशासन ने कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का हवाला दिया। इसी कारण बैठक बिना किसी ठोस निष्कर्ष के समाप्त हो गई। वार्ता विफल होने के बाद पत्रकारों ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। पत्रकार संगठनों ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो 29 मई से तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा। पत्रकारों का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पत्रकारिता के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा मामला है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय प्रशासन भी दबाव में दिखाई दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश जारी है और दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने की अपील की गई है। प्रशासन ने यह भी संकेत दिए हैं कि आगे फिर से वार्ता कर समाधान निकालने का प्रयास किया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर इस विवाद को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर भी बनी हुई है। कई संगठनों ने पत्रकारों के समर्थन में आवाज उठानी शुरू कर दी है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि बातचीत के जरिए ही विवाद का समाधान निकाला जाना चाहिए ताकि माहौल और अधिक खराब न हो। फिलहाल लक्सर में प्रशासन और पत्रकारों के बीच बना यह टकराव आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। अब सभी की नजरें 29 मई पर टिकी हुई हैं, जब पत्रकारों द्वारा घोषित बेमियादी धरना शुरू होने की संभावना है। Post Views: 2 Post navigation गैस संकट से हड़कंप: हरिद्वार में PNG पाइपलाइन फटने से 2000 घरों की गैस सप्लाई ठप कोटद्वार के “मोहम्मद दीपक” पर आर्थिक संकट, बंद होने की कगार पर पहुंचा जिम