Spread the loveचमोली/देहरादून। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में दो अलग-अलग घटनाओं ने मंदिर प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर श्रद्धालुओं के चढ़ावे के कथित दुरुपयोग को लेकर विवाद गहरा गया है, वहीं दूसरी ओर मंदिर के गर्भगृह में प्रतिबंध के बावजूद स्पाई कैमरे से वीडियो रिकॉर्डिंग करने का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है। चढ़ावे से जुड़े विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित सीसीटीवी वीडियो से हुई, जिसमें मंदिर समिति के एक कर्मचारी पर नकदी के प्रबंधन को लेकर आरोप लगाए गए। मामले के तूल पकड़ने के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारी को मंदिर संबंधी कार्यों से अलग कर दिया और पूरे मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित कर दी। समिति को निर्धारित समय में अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। मंदिर समिति का कहना है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जाएगी तथा यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बीच कुछ सामाजिक संगठनों और हक-हकूकधारियों ने विभागीय जांच पर सवाल उठाते हुए मामले की SIT अथवा न्यायिक निगरानी में जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए ताकि पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी तरीके से सच्चाई सामने आ सके। दूसरी ओर मंदिर समिति का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी और किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई होगी। विवाद के बीच यह जानकारी भी सामने आई कि आरोप सार्वजनिक होने से कुछ दिन पहले मंदिर परिसर के सभी 32 सीसीटीवी कैमरे बदले गए थे। मंदिर समिति ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि कैमरों का परिवर्तन एक नियमित प्रक्रिया के तहत किया गया था तथा पुराने कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है, जिसे जांच समिति आवश्यक होने पर देख सकती है। समिति का दावा है कि इससे जांच किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं होगी। इसी दौरान सोमवार, 6 जुलाई को बद्रीनाथ धाम में सुरक्षा से जुड़ा एक और मामला सामने आया। पुलिस के अनुसार, मुंबई निवासी एक श्रद्धालु को गर्भगृह के भीतर स्पाई कैमरा लगे चश्मे के माध्यम से वीडियो रिकॉर्डिंग करते हुए पकड़ा गया। मंदिर के गर्भगृह में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित है। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए व्यक्ति को हिरासत में लिया, उसके पास मौजूद रिकॉर्डिंग हटवाई गई और उत्तराखंड पुलिस अधिनियम के प्रावधानों के तहत चालान करने के बाद भविष्य में नियमों का पालन करने की सख्त चेतावनी देकर छोड़ दिया। इन दोनों घटनाओं के बाद बद्रीनाथ धाम में सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं के चढ़ावे के प्रबंधन और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल चढ़ावा विवाद की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। ऐसे में आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड में मानसून का कहर: कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी, इन सावधानियों का रखें विशेष ध्यान